ब्रजभाषा साहित्य में सूरदास का काव्य सूर्य के समान- खेमचंद यदुवंशी
गोवर्धन। ‘ब्रजभाषा साहित्य में भक्त सूरदास का काव्य सूर्य के समान है जिसके प्रकाश में वात्सल्य रस की उत्तपत्ति हुई है। उनका काव्य वात्सल्य रस की पूर्ण अनुभूति कराने में आज भी पूर्णतः समर्थ है, हमें उनके काव्य को नई पीढ़ी तक पहुंचना अति आवश्यक है।उक्त विचार परासौली स्थित भक्त सूरदास की साधना-स्थली ‘सूर कुटी’ […]
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