सूरदास की तपोस्थली पर ब्रजभाषा अकादमी का शुभारंभ, ब्रजभाषा के मानकीकरण, व्यावहारिक प्रयोग और शोध को बढ़ावा देने पर दो दिवसीय संगोष्ठी
गोवर्धन। ब्रजभाषा के संरक्षण और संवर्धन की दशकों पुरानी मांग शनिवार को पूरी हुई। सूरदास जी की तपोस्थली पारासौली में उनकी कुटी के निकट नवनिर्मित सूरदास ब्रजभाषा अकादमी के भवन का उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद के उपाध्यक्ष शैलजाकांत मिश्र ने फीता काटकर शुभारंभ किया।
इस अवसर दो आयोजित ‘ब्रजभाषा का मानकीकरण और व्यावहारिकता’ विषय पर दो दिवसीय संगोष्ठी में साहित्यकारों, विद्वानों और ब्रजभाषा के जानकारों ने भाषा के भविष्य को लेकर विचार साझा किए। मुख्य अतिथि शैलजाकांत मिश्र ने अकादमी के लिए सबसे पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आभार जताया। उन्होंने कहा कि ब्रजभाषा को केवल साहित्य और पुस्तकों तक सीमित रखकर जीवंत नहीं रखा जा सकता। इसके संरक्षण के लिए जरूरी है कि इसे आम बोलचाल, सामाजिक संवाद और दैनिक व्यवहार में निरंतर इस्तेमाल किया जाए। भाषा समय के साथ विकसित होती है। यदि अन्य भाषाओं के प्रचलित शब्द ब्रजभाषा में सहजता से समाहित होते हैं तो उन्हें अपनाने में संकोच नहीं करना चाहिए। इससे ब्रजभाषा की मूल पहचान और भाव को बनाए रखते हुए उसे अधिक व्यावहारिक बनाया जा सकता है।
दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर रहे साहित्यकार डॉ. ललित बिहारी गोस्वामी की कहा कि यह सूरदास जी की तपोस्थली और महाप्रभु वल्लभाचार्य की बैठक के निकट स्थित होने से अकादमी की स्थापना का स्थान ऐतिहासिक और आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण पहल है।
संत हरिओम बाबा ने कहा कि प्रदेश सरकार ने ब्रज की सांस्कृतिक और धार्मिक धरोहरों को संरक्षित कर उन्हें जीवंत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण बताया।
अकादमी के निदेशक डॉ. केशव देव शर्मा ने ब्रजभाषा में संबोधन देते हुए कहा कि भाषा के संरक्षण के लिए शोध कार्यों को प्रोत्साहित करना, व्यवस्थित डाटाबेस तैयार करना और नियमित पत्रिका का प्रकाशन आवश्यक है। सूरदास के पदों सहित ब्रज के समृद्ध साहित्य का संकलन एवं संरक्षण किया जाना चाहिए। इसके साथ ही सभी रचनाकारों, साहित्यकारों और ब्रजभाषा के विद्वानों को साथ लेकर अकादमी को व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा।
दूरदर्शन मथुरा के निदेशक सत्यव्रत सिंह ने बताया कि आकाशवाणी के अभिलेखागार में करीब आठ हजार टेप सुरक्षित हैं, जिनमें लगभग 2400 ब्रजभाषा के लोकगीत, वार्ताएं, ढोला, रेखाचित्र और नौटंकी सहित विभिन्न कार्यक्रमों की रिकॉर्डिंग शामिल हैं। आकाशवाणी और दूरदर्शन के पास उपलब्ध इस समृद्ध सामग्री का उपयोग अकादमी के शोध, अभिलेखीकरण और प्रचार-प्रसार में किया जा सकता है।
ब्रज माधुरी की एंकर चंद्रवती ने कहा कि केवल साहित्य को संरक्षित करने से ब्रजभाषा का संरक्षण संभव नहीं है। इसके लिए ब्रज के लोक कलाकारों और उभरती प्रतिभाओं को तलाशकर उन्हें उचित मंच उपलब्ध कराना भी जरूरी है, ताकि भाषा लोकजीवन में निरंतर प्रचलित रहे।
इस ऐतिहासिक अवसर
संगोष्ठी का संचालन हंसराज कॉलेज, दिल्ली के एसोसिएट प्रोफेसर एवं साहित्यकार डॉ. नृत्य गोपाल शर्मा ने किया।
कार्यक्रम के अंत में परिषद के अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी राजीव पांडेय ने सभी का आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर नगर पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि मनीष शर्मा, सत्यप्रकाश शर्मा ‘सोटानंद’, पूरन कौशिक, नरेंद्र कुमार नरेंद्र, ब्रज संस्कृति विशेषज्ञ डॉ. उमेश चंद्र शर्मा, नीतू गोस्वामी, रेनू उपाध्याय, कपिल देव उपाध्याय,
विट्ठल पारीक जयपुर, डॉ रश्मि वर्मा, कुबेर दत्त गौतम, पूनम शर्मा पूर्णिमा अलीगढ़, हरी बाबू ओम, देवेंद्र शर्मा सूर श्याम सेवा मंडल, देवी प्रसाद गौड व महेंद्र सिंगला
सहित दूधनाथ यादव, गीता शोध संस्थान के समन्वयक चंद्र प्रताप सिंह सिकरवार, राजस्व समन्वयक चंद्रिका प्रसाद राय आदि भी उपस्थित थे।