रसखान समाधि स्थल पर ब्रज की लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत का होगा संगम

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उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद एवं जीएलए विश्वविद्यालय, मथुरा के संयुक्त तत्वावधान में महावन में 6 से 10 अक्टूबर तक सांझी महोत्सव

गोकुल/महावन (मथुरा)। ब्रज की प्राचीन लोक परंपराओं, सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक कला को संरक्षण एवं प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद एवं जीएलए विश्वविद्यालय, मथुरा के संयुक्त तत्वावधान में 6 से 10 अक्टूबर तक महावन स्थित श्रीकृष्ण के भक्त रसखान एवं ताजबीबी उपवन में सांझी महोत्सव का आयोजन किया जाएगा। पांच दिवसीय इस महोत्सव में सांझी कला की विभिन्न विधाओं के साथ कार्यशालाओं, संगोष्ठियों, भजन संध्या और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से ब्रज की समृद्ध लोक संस्कृति का प्रदर्शन होगा।
महोत्सव में प्रतिदिन प्रातः 11 बजे से सायं 5 बजे तक केनवास सांझी, सूखे व गीले रंगों की सांझी, जल सांझी, पोट्रेट एवं रंगोली सांझी, गोबर सांझी तथा सांझी कला में प्रयुक्त सामग्री की प्रदर्शनी लगाई जाएगी। इसके साथ ही सांझी कला के कौशल विकास के लिए प्रशिक्षण कार्यशाला भी आयोजित होगी। इसके अलावा
महोत्सव में प्रतिदिन सायं 5 बजे से रात 8:30 बजे तक सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। इनमें कथक नृत्य, भजन संध्या, जिकड़ी भजन, लोक गायन, गीता के प्रेरक कार्यक्रम, सांझी कला पर संगोष्ठी और ब्रजभाषा काव्य सम्मेलन प्रमुख आकर्षण होंगे।
यह आयोजन ब्रज की सांझी कला को व्यापक पहचान दिलाने, पारंपरिक कलाकारों को मंच उपलब्ध कराने तथा लोक परंपराओं के प्रति नई पीढ़ी में रुचि विकसित करने का अवसर बनेगा।
महोत्सव के समन्वयक चन्द्र प्रताप सिंह सिकरवार तथा रसखान उपवन के व्यवस्थापक अनुपम यादव ने बताया कि आयोजन की तैयारियां शुरु हो गई हैँ।

महोत्सव के सांस्कृतिक कार्यक्रम

6 अक्टूबर को माधव मिश्र और राघव मिश्र बन्धु सांझी गीत एवं रसखान पद गायन प्रस्तुत करेंगे।

7 अक्टूबर को तलवीर ब्रजवासी एवं सांझी कलाकारों द्वारा ब्रज लोकगीत और गीता शोध संस्थान एवं रसलीला अकादमी, वृंदावन की ओर से गीता श्लोक अंताक्षरी, पुरुषोत्तम योग गीत पाठ एवं भजन आयोजित होंगे।

8 अक्टूबर को दिल्ली के कथक केंद्र की सुधी चेतना शर्मा कथक नृत्य प्रस्तुत करेंगी। इसी दिन श्यामवीर एवं साथी कलाकारों द्वारा जिकड़ी भजन और लोक गायन होगा।

9 अक्टूबर को सांझी कला परंपरा एवं संरक्षण विषय पर संगोष्ठी आयोजित होगी।

10 अक्टूबर को ब्रजभाषा कवि सम्मेलन में विभिन्न कवि अपनी रचनाएं प्रस्तुत करेंगे।

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