50 हजार परिवारों तक पहुंचने का लक्ष्य, चित्रकूट-बांदा से शुरू होगा जनसंपर्क अभियान
मांट मूला में महेंद्र प्रताप ने यात्रियों से पूछा—मूल गर्भगृह स्थल पर भव्य मंदिर बनना चाहिए या नहीं; हाथ उठाकर जताया समर्थन
मथुरा।
श्रीकृष्ण जन्मभूमि के मूल गर्भगृह स्थल पर भव्य-दिव्य मंदिर निर्माण की मांग को लेकर चल रहे जनजागरण अभियान को अब कोल, भील और निषाद समाज तक पहुंचाने की तैयारी है। श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति न्यास के अध्यक्ष एवं श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह मस्जिद केस में हिंदू पक्षकार महेंद्र प्रताप सिंह एडवोकेट ने रविवार को मांट मूला स्थित नरसिंह मंदिर में अभियान की घोषणा की। सुभलदास जी महाराज और गोपालदास जी महाराज के सानिध्य में बंगाल समेत कई राज्यों से पहुंची यात्रा में शामिल यात्रियों को संबोधित करते हुए उन्होंने गांव-गांव संपर्क का आह्वान किया।
महेंद्र प्रताप सिंह ने विदेशी आक्रांताओं द्वारा मंदिरों को तोड़े जाने के इतिहास का उल्लेख करते हुए यात्रियों से सीधा संवाद किया। उन्होंने पूछा कि क्या भगवान श्रीकृष्ण के मूल गर्भगृह स्थल पर भव्य-दिव्य मंदिर का निर्माण होना चाहिए? यात्रियों ने हाथ उठाकर समर्थन जताया और उनके साथ खड़े रहने का संकल्प व्यक्त किया।
चौपालों से नई पीढ़ी तक पहुंचेगा संदेश
न्यास की योजना के मुताबिक पहले चरण में करीब 50 हजार परिवारों से संपर्क किया जाएगा। चित्रकूट, बांदा और आसपास के क्षेत्रों में गांवों की चौपालों, सामाजिक संगठनों, संतों और स्थानीय प्रबुद्ध लोगों के साथ संवाद होगा। कोल, भील और निषाद समाज की लोकगाथाओं, वीरगाथाओं, लोकगीतों और सांस्कृतिक परंपराओं का संकलन कर उन्हें स्थानीय लोकभाषा और लोकशैली में नई पीढ़ी तक पहुंचाने की योजना है।
महेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह मस्जिद मामले में हिंदू पक्ष न्यायालय में अपनी पैरवी कर रहा है और अंतिम निर्णय अदालत को करना है। न्यायालय में पैरवी के साथ सामाजिक स्तर पर जनजागरण जारी रहेगा। इसी क्रम में अब कोल, भील और निषाद समाज के बीच गांव-गांव पहुंचने की तैयारी है।