संरक्षित स्मारक बोर्ड से कुछ मीटर की दूरी पर कूड़े का ढेर, धरोहर की हो रही दुर्दशा

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मथुरा। जमुनापार क्षेत्र में पुरातत्व महत्व की भूमि को बचाने के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा लगा “संरक्षित स्मारक” का बोर्ड तो मौजूद है, लेकिन यहां से महज कुछ मीटर की दूरी पर ही हिफाजत के नाम पर सिर्फ कूड़े का पहाड़ दिखाई दे रहा है।

गांव गौसना में साफ देखा जा सकता है कि भरतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) का नीले रंग का बोर्ड यह बताता है कि यह स्थान प्राचीन संस्मारक तथा पुरातात्विक स्थल एवं अवशेष अधिनियम 1958 के तहत राष्ट्रीय महत्व का घोषित है। बोर्ड पर यह भी लिखा है कि इसे क्षति पहुंचाने या कुरूप करने पर 2 साल तक का कारावास या 1 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।

लेकिन बोर्ड से कुछ ही दूरी पर हालात बिल्कुल उलट हैं। संरक्षित दीवार के साथ-साथ सड़क किनारे घरेलू कचरा, पॉलिथीन, कपड़े और गंदगी का ढेर लगा हुआ है। दीवार के ऊपर तक कचरा फैला है जिससे इस ऐतिहासिक स्थल का स्वरूप बिगड़ रहा है।

लोगों में चर्चा है कि रोजाना यहां कूड़ा डाला जा रहा है। प्रशासन और पुरातत्व विभाग की लापरवाही के चलते धरोहर को नुकसान हो सकता है।

शाहपुर-गौसना ग्राम पंचायत के प्रधान प्रतिनिधि मनोज कुमार ने बताया कि ग्राम पंचायत में कूडे के लिए कोई स्थान न होने की वजह से यहाँ कूड़ा डाल दिया जाता है।
इस सम्बंध में एसडीएम महावन से सम्पर्क करने का प्रयास किया गया लेकिन बात नहीं हो सकी ।

लोगों ने मांग की है कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण और जिला प्रशासन तुरंत संज्ञान लेकर कूड़ा हटवाए और दोषियों पर सख्त कार्रवाई करे, ताकि राष्ट्रीय महत्व के इस स्मारक को बचाया जा सके।

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