
जागरूकता रैली का झंडी दिखाकर जिला पंचायत अध्यक्ष ने किया शुभारंभ
केएम अस्पताल में डिप्टी सीएमओ टीबी मरीजों को वितरित किए पोषण बैग
टीबी दिवस पर केएम विश्वविद्यालय में हुए विविध जन जागरूकता कार्यक्रम
डिप्टी सीएमओ ने सरकार द्वारा टीबी मरीजों के लिए चलाई जा रही कार्यक्रमों की दी जानकारी
टीबी एक दूसरे से फैलता है, यह टीबी शरीर के किसी भी अंग में हो सकता है : कुलपति

मथुरा। विश्व क्षय दिवस के अवसर पर केएम विश्वविद्यालय के मेडीकल कालेज एंड हॉस्पिटल के क्षय रोग विभाग द्वारा अस्पताल में तीन दिवसीय जागरूकता कार्यक्रम तहत जागरूकता संगोष्ठी, जनजागरूकता रैली़, पोस्टर व नुक्कड़ नाटक प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। जिसमें मैराथन दौड़ का शुभारंभ झंडी दिखाकर जिला पंचायत अध्यक्ष एवं विश्वविद्यालय के कुलाधिपति किशन चौधरी किया और स्वयं भी डाक्टर्स, यूजी-पीजी और सैकड़ों एमबीबीएस छात्र-छात्राओं के साथ रैली में सहभागिता दिखाकर सभी का उत्साहवर्धन किया। इसके उपरांत विवि में विश्व टीबी दिवस की थीम ‘‘हॉं! हम टीबी को समाप्त कर सकते हैं(‘यस! वी केन ऐन्ड टीबी’) पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में सर्वप्रथम मुख्य अतिथि स्वास्थ्य विभाग के डिप्टी सीएमओ डा. गोपाल बाबू गर्ग, विवि के कुलपति डा. एनसी प्रजापति अन्य अतिथियों का क्षय रोग विभाग के चिकित्सकों ने शॉल उड़ाकर, श्रीराधाकृष्णा की प्रतिमा एवं फुल के बुके देकर स्वागत किया।

कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथियों सहित अस्पताल के मेडीकल सुप्रीडेंट डा. आरपी गुप्ता, एडीशनल मेडीकल सुप्रीडेंट डा. नमित गौतम, मेडीकल प्राचार्य डा. पीएन भिसे, नेत्र रोग एचओडी डा. एमके तनेजा संयुक्त रूप से सरस्वती मां के समक्ष दीप प्रज्जवलित करके किया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि द्वारा पोस्टर प्रतियोगिता, नुक्कड़ नाटक के प्रथम, द्वितीय, तृतीय विजेताओं सहित बॉयोलॉजी के प्रो. डा. दिनेश कुमार, मेडीसन के सीनियर रेसीडेंस डा. निशांत मलिक एवं स्त्री रोग विभाग की सीनियर रेजीडेंटस डा. ऐश्वर्या त्रिपाठी को प्रशिस्त पत्र और शील्ड देकर सम्मानित किया गया। वहीं अतिथियों के द्वारा 50 टीबी मरीजों को पोषण बैग वितरित किए गए।

मुख्य अतिथि डिप्टी सीएमओ डा. गोपाल बाबू गर्ग द्वारा टीबी मरीजों को समय समय पर अपने स्वास्थ्य की जांच कराते रहना चाहिए। उन्हें नियमित अपने वजन, हीमोग्लोबिन, बलगम की जांच कर दवा का सेवन करना है। क्षय मरीजों को समय पर दवा का सेवन करने और सरकार द्वारा टीबी मरीजों के लिए चलाई जा रही कार्यक्रमों की भी जानकारी दी गई। पहले टीबी के मरीज अस्पताल आने से डरते थे, लेकिन सरकार के अहम कदम से आज टीबी बीमारी समाप्ति की ओर है, प्रधानमंत्री मोदी के 2030 तक भारत टीबी मुक्त हो जायेगा।

विवि के कुलपति डा. एनसी प्रजापति ने कहा टीबी का इतिहास पुराना, हमारा प्रयास सदा इसे समाप्त करने में रहेगा। टीबी एक दूसरे से फैलता है, यह टीबी शरीर के किसी भी अंग में हो सकता है। आधुनिक तकनीकों की मदद से अब मल्टी-ड्रग रेजिस्टेंट टीबी का पता महज 90 मिनट में लगाया जा सकता है। नियमित रूप से दवाएं लेने पर टीबी पूरी तरह से ठीक हो सकती है।

टीबी चेस्ट की सीनियर रेसींडेंस डा. मणी तिवारी ने कहा टीबी सबसे सकारात्मक बीमारी है, जो हवा के जरिए फैलती है, छाती के अलावा शरीर के किसी भी हिस्से को टीबी प्रभावित कर सकती है, खांसी, पसीना, भूख न लगना, सिर में दर्द, पेट फूलना जैसी तकलीफ कर दो सप्ताह से अधिक है तो जांच करवाएं, पूरा इलाज ही टीबी से मुक्त करा सकता है। उन्होंने कहा टीबी से डरे नहीं, नजरांदाज करें नहीं, संकल्प ले ‘‘टीबी का अंत करके नये भारत का निर्माण करेंगे। वहीं मेडीकल प्राचार्य डा. पीएन भिसे ने कहा जर्मन फिजिशियन और माइक्रोबायोलॉजिस्ट रॉबर्ट कोच ने वर्ष 1882 में टीबी के कारक बैक्टीरिया माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरक्युलोसिस की खोज की थी, और इसी उपलक्ष्य में इस दिन को विश्व टीबी दिवस के रूप में मनाया जाता है। टीबी हरेगा-भारत जीतेगा करके अपना उद्बोधन समाप्त किया।

तीन दिवसीय कार्यक्रम में टीबी जागरूकता के संदर्भ में नुक्कड़ नाटक इंटर्न छात्र-छात्राओं एवं पोस्टर प्रतियोगिता अन्य कार्यक्रमों में जेआर डाक्टर्स सहित एमबीबीएस के छात्राओं ने भाग लिया। टीबी जागरूकता रैली, पोस्टर प्रतियोगिता, नुक्कड़ नाटक, लघु फिल्म और संगोष्ठी कार्यक्रम की अध्यक्षता टीबी रोग विभागाध्यक्ष डा. कार्तिक मिश्रा, डा. सिद्धार्थ मिश्रा, डा. मणी तिवारी की, जबकि मंच का सफल संचालन पीजी रेसीडेंस डा. आशीष ने किया। तीन दिवसीय कार्यक्रम को सफल बनाने में क्षय रोग विभाग के असिटेंट प्रोफेसर डा. रवि कुंतल, सीनियर रेसीडेंस डा. सिद्धार्थ, डा. मणी तिवारी, पीजी डा. विशेष, डा. प्रखर, डा. रवि, डा. मोहिनी, इंटर्न डा. सर्वेश, डा. अभिनव, डा. सिद्धांत मिश्रा, डा. केशव, डा. ज्योति, डा. समृद्धि, रेसीडेंस श्रुति, वैभव प्रताप, विद्धूषी के अलावा एमबीबीएस बैच के 2025 के छात्र-छात्राओं का विशेष सहयोग रहा।
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