व्यवहार शून्य व समर्पित जीवन पूज्य बाबा के वैराग्य की पराकाष्ठा : प्रेमानंद जी महाराज
हाथरस। ”कलियुग केवल नाम अधारा। सुमिर सुमिर नर उतरहिं पारा॥” रामचरित मानस की इस चौपाई को वास्तव में गर्वधन वाले बाबा ने चरितार्थ कर के दिखाया है। गृहस्थ से संत और संत से समर्पण का रास्ता तय कर भगवत प्राप्ति कर स्वयं ही नहीं शिष्य परिक को भी प्रभु मिलन का रास्ता बता गये बाबा […]
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