योगी सरकार में संवर रही कान्हा की नगरी, 30 हजार करोड़ के मास्टर प्लान से मथुरा-वृंदावन बन रहा वैश्विक धार्मिक केंद्र

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– 1645 करोड़ से बन रहा वृंदावन बाईपास और एलिवेटेड रोड से यातायात होगा सुगम, जाम से मिलेगी मुक्ति

– विश्राम घाट से केशी घाट तक तटीय विकास, 100 से अधिक पौराणिक कुंडों और सरोवरों का हुआ ईको-रेस्टोरेशन

– श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए आधुनिक टूरिस्ट फैसिलिटेशन सेंटर, ई-बसें और मल्टीलेवल कार पार्किंग तैयार

– सेफ सिटी प्रोजेक्ट के तहत 5000 से अधिक सीसीटीवी कैमरे और बांके बिहारी कॉरिडोर से सुगम व सुरक्षित होंगे दर्शन

मथुरा, 01 सितम्बर। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार पिछले 9 वर्षों में कान्हा की नगरी मथुरा-वृंदावन और पूरे ब्रज क्षेत्र में अभूतपूर्व विकास कार्य करा रही है। वर्ष 2017 में ‘उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद’ के गठन के बाद से मथुरा को अयोध्या और काशी की तर्ज पर एक वैश्विक धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। ₹30,000 करोड़ के मास्टर प्लान के तहत सड़क, परिवहन, घाट, मंदिर गलियारे और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े कई बड़े प्रोजेक्ट्स पूरे हो चुके हैं और कई पर तेजी से काम चल रहा है। योगी सरकार की यह विकास यात्रा आधुनिक तीर्थ नगरी की मजबूत नींव रख रही है।

सड़कों और एलिवेटेड रूट्स का बिछा जाल
ब्रज में पर्यटन के बढ़ते दबाव को देखते हुए योगी सरकार ने सड़क इंफ्रास्ट्रक्चर पर विशेष जोर दिया है। शहर को जाम से मुक्त करने के लिए एनएच-19 और यमुना एक्सप्रेस-वे को जोड़ने वाले 15.4 किलोमीटर लंबे वृंदावन बाईपास को 1,645 करोड़ रुपये की लागत से स्वीकृति दी गई है। इसके अतिरिक्त मथुरा- वृंदावन के बीच आवागमन सुगम बनाने के लिए पुरानी रेल लाइन की जगह लगभग 470 करोड़ रुपये की लागत से फोरलेन और एलिवेटेड रोड का निर्माण तेज गति से चल रहा है। सीएम ग्रिड (ग्रीन रोड) योजना के तहत 150 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से श्री कृष्ण जन्मभूमि क्षेत्र, गोविंद नगर और शहर के पांच प्रमुख मार्गों का सीसी रोड निर्माण, अंडरग्राउंड केबलिंग और फुटपाथ विकास का काम भी जारी है। यमुना एक्सप्रेस-वे पर राया के पास हेरिटेज सिटी विकसित करने की योजना के तहत परिक्रमा मार्गों को कमर्शियल हब से जोड़ा जा रहा है।

घाटों का कायाकल्प और पौराणिक कुंडों का पुनरुद्धार
ब्रज की सांस्कृतिक पहचान यमुना नदी और यहां के प्राचीन कुंडों को संरक्षित करने के लिए सरकार ने ऐतिहासिक कदम उठाए हैं। विश्राम घाट से लेकर केशी घाट तक तटीय सुविधाओं का विस्तार और सौंदर्यीकरण किया गया है। वृंदावन में 7.6 करोड़ रुपये की लागत से नए अक्रूर घाट का निर्माण हो रहा है और देवरहा बाबा घाट के पास यमुना पर केबल स्टे सस्पेंशन ब्रिज की योजना स्वीकृत है। प्राचीन घाटों की स्थापत्य कला को उभारने के लिए केशी घाट और परिक्रमा मार्ग के प्रमुख भवनों पर आधुनिक फसाड लाइटिंग लगाई गई है। साथ ही सुनरख में सौभरि ऋषि वाटर बॉडी, करहला में बज्रनाभ समाधि परिसर और ब्रज क्षेत्र के 100 से अधिक प्राचीन कुंडों का ईको- रेस्टोरेशन कर उन्हें नया जीवन दिया गया है।

श्रद्धालुओं के लिए पार्किंग और आधुनिक सुविधाओं का विस्तार
तीर्थयात्रियों की सुविधा के लिए योगी सरकार ने मल्टीलेवल कार पार्किंग और यात्री सुविधाओं पर बड़ा निवेश किया है। वृंदावन के टूरिस्ट फैसिलिटेशन सेंटर (टीएफसी) के पास 38 करोड़ रुपये की लागत से मल्टीलेवल पार्किंग बनी है, जबकि गोवर्धन और बरसाना में भी बड़े पार्किंग स्थल तैयार किए गए हैं। श्रद्धालुओं के विश्वस्तरीय ठहराव के लिए वृंदावन और बरसाना में 35 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से आधुनिक टीएफसी केंद्रों का निर्माण और विस्तार किया गया है। मथुरा- वृंदावन के बीच प्रदूषण मुक्त आवागमन के लिए नए ई-बस टर्मिनल्स बनाए गए हैं और इलेक्ट्रिक बस सेवा व चार्जिंग स्टेशन का संचालन शुरू किया गया है।

मंदिरों का सौंदर्यीकरण और कॉरिडोर का निर्माण
श्रद्धालुओं की सुगम यात्रा के लिए बांके बिहारी मंदिर के आसपास भीड़ नियंत्रण हेतु भव्य कॉरिडोर निर्माण की योजना पर कार्य जारी है। श्रीकृष्ण जन्मभूमि क्षेत्र के पहुंच मार्गों, चौराहों और सड़कों को हेरिटेज लाइटिंग और फसाड डेवलपमेंट के जरिए संवारा गया है। गोवर्धन के 21 किलोमीटर लंबे परिक्रमा मार्ग और बरसाना परिक्रमा मार्ग को चौड़ा कर वहां शेड, होल्डिंग एरिया, पेयजल और यात्री शौचालयों की सुविधा विकसित की गई है। इसके अलावा जिला सीमाओं और एक्सप्रेस- वे पर भव्य पौराणिक शैली के प्रवेश द्वार, गीता शोध संस्थान और रासलीला अकादमी में गेस्ट हाउस तथा कन्वेंशन सेंटर का निर्माण कराया गया है।

‘सेफ सिटी’ से सुरक्षा और स्मार्ट सिटी के तहत स्वच्छता
मथुरा- वृंदावन को ‘सेफ सिटी’ प्रोजेक्ट के तहत पूरी तरह से चाक- चौबंद किया गया है। सुरक्षा और निगरानी के लिए पूरे क्षेत्र में 5000 से अधिक सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, जिनका सीधा नियंत्रण इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (आईसीसीसी) से हो रहा है। वहीं स्वच्छता और अपशिष्ट प्रबंधन के लिए इंटीग्रेटेड फ्लावर मैनेजमेंट सेंटर, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट और कुंभ मेला मैदान में श्रद्धालुओं के लिए स्थायी और आधुनिक सुविधाएं विकसित की गई हैं, जिससे ब्रज की स्वच्छता और आभा दोनों में वृद्धि हुई है।

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