गोवर्धन में अनंत चतुर्दशी पर गिरिराजजी का भव्य महाभिषेक व अलौकिक छप्पन भोग, सप्तरत्न श्रृंगार से निहाल हुए भक्त

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गोवर्धन (मथुरा): अनंत चतुर्दशी के पावन अवसर पर गोवर्धन नगरी गिरिराज महाराज के जयकारों, ढोल-नगाड़ों, मृदंग और शहनाई की मधुर ध्वनि से गुंजायमान हो उठी। गिरि तलहटी में आयोजित भव्य समारोह में प्रभु के अलौकिक दर्शन पाने के लिए हजारों की संख्या में श्रद्धालु उमड़ पड़े।

समिति पदाधिकारियों ने किया अतिथियों व श्रद्धालुओं का स्वागत
आयोजन के दौरान समिति के संस्थापक मुरारी अग्रवाल ने संस्कृति विश्वविद्यालय के जनसंपर्क अधिकारी, वरिष्ठ पत्रकार किशन चतुर्वेदी व उनकी धर्मपत्नी का पटुका पहनाकर और उपहार भेंटकर भावभीना स्वागत किया। इसके साथ ही समिति के संरक्षक राजेन्द्र कुमार सर्राफ, महामंत्री अशोक कुमार, दिनेश सादाबाद, कोषाध्यक्ष भगवान दास खंण्डेलवाल, देवेश सरन सर्राफ, नीरज गोयल, मुख्य संयोजक राघवेन्द्र गर्ग एवं शंकर सुरेखा आदि पदाधिकारियों ने दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं का पटुका पहनाकर आत्मीय स्वागत एवं अभिनन्दन किया।

कामधेनु गाय के दूध और जड़ी-बूटियों से पंचरत्नम महाभिषेक
अनंत चतुर्दशी पर शाम 4 बजे से प्रभु का पंचरत्नम महाभिषेक कामधेनु गाय के दूध, दुर्लभ जड़ी-बूटियों एवं पंच पात्र द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के साथ संपन्न कराया गया। महाभिषेक के दौरान समूचा परिक्रमा मार्ग और तलहटी जयकारों से गूंज उठी।

सप्तरत्नों और हीरा जड़ाऊ बांसुरी से हुआ दिव्य श्रृंगार
महाभिषेक के उपरांत प्रभु गिरिराज जी का अद्भुत और अलौकिक श्रृंगार किया गया। प्रभु चांदी के कमल पुष्प पर शेषनाग के फन पर विराजमान हुए। उन्हें हीरे, मोती, पन्ना, पुखराज, नीलम और गोमेद जैसे सप्तरत्नों से जड़ी मोरपंखी तथा हीरा जड़ित बांसुरी धारण कराई गई। प्रभु की इस अनुपम आभा को देख भक्त भाव-विभोर हो उठे।

21 हजार किलो महाप्रसाद और सोने-चांदी के वर्क वाले व्यंजन
आयोजन के दौरान प्रभु को अलौकिक छप्पन भोग समर्पित किया गया। कामधेनु गाय के दूध से तैयार लगभग 21 हजार किलोग्राम महाप्रसाद अर्पित किया गया, जिसमें सोने और चांदी के वर्क से सजे विभिन्न प्रकार के दिव्य व्यंजन शामिल रहे।

बड़ी परिक्रमा में पहुंचे भक्तों ने गिरिराज प्रभु के इस भव्य रूप के दर्शन कर पुण्य लाभ कमाया और स्वयं को निहाल माना।

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