मथुरा के लाल को भूटान में मिला विश्व स्तरीय सम्मान

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भूटान सरकार द्वारा प्रदान किया गया अंतर्राष्ट्रीय इंडो- भूटान साहित्य कला रत्न सम्मान – 2025

जल्द ही इंडो भूटान साहित्य कला व संस्कृति आपस में साझा की जाएगी

इस आयोजन में भारतीय भगतलीला, रामलीला और रासलीला का होगा मनोहारी मंचन।

मथुरा। भारतीय हिन्दी दिवस के अवसर पर भूटान सरकार ने नेहरू-वांगचुक सांस्कृतिक केन्द्र थिंपू व जोंगखा सर्पांग विकास परिषद, थिंपू भूटान द्वारा आयोजित
छः दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय भूटान साहित्य महोत्सव 2025 में मथुरा के लाल अंतर्राष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त वरिष्ठ साहित्यकार व लोकनाट्य विशेषज्ञ आचार्य डॉ. खेमचन्द यदुवंशी शास्त्री को भारतीय साहित्य व लोकनाट्य को विश्व स्तर पर स्थापित करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय इंडो- भूटान साहित्य कला रत्न सम्मान – 2025 से सम्मानित किया है।

यह विश्व स्तरीय सम्मान भूटान सरकार के गृह संस्कृति मंत्री लोयपो शेरूब ग्याल्त्शेन व भारतीय राजदूत संदीप सिंह, मास्को की इंटरनेशनल ब्रांड एम्बेसडर डॉ श्वेता सिंह, भूटानी पोएट्री क्लब थिंपू भूटान की संस्थापिका सीता माया चुंग रॉय तथा क्रान्तिधरा साहित्य अकादमी के अध्यक्ष डॉ. विजय पंडित द्वारा प्रदान करते हुए भारतीय साहित्य कला व संस्कृति की भूरि भूरि प्रशंसा की और कहा कि भारत से हमारे बहुत गहरे आत्मीय संबंध हैं, जल्द ही इंडो भूटान संस्कृति कला व साहित्य को साझा किया जाएगा जिससे दोनों देशों की संस्कृति समृद्ध होगी।

इसी क्रम में डॉ. देवेन्द्र कुमार अरोड़ा और सीता माया चुंग रॉय (थिंपू – भूटान), डॉ. श्वेता सिंह (मास्को) आदि को हिन्दी व जोंगखा भाषा के उत्थान और अपने देशों की कला व संस्कृति को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने हेतु सम्मानित किया गया।


बॉक्स में प्रयोगार्थ:

भूटान से हमारे संवाददाता को आचार्य डॉ. खेमचंद यदुवंशी शास्त्री ने मोबाइल पर बताया कि भूटान की धरती पर प्राप्त यह सम्मान हर हिन्दी प्रेमी भारतीय का सम्मान है और मैं इसे भारतीय साहित्य व कला प्रेमियों को समर्पित करता हूँ क्योंकि वास्तव में यह उन सभी सुधी जनों का सम्मान है जिन्होंने मुझे आशीर्वाद प्रदान करते हुए देश की कला संस्कृति वो साहित्य के लिए कुछ करने की प्रेरणा दी।
इस आयोजन में भारतीय भगतलीला रामलीला, रासलीला का भी मंचन भी किया जाएगा।


मथुरा जनपद के गाँव बाटी निवासी आचार्य डॉ. खेमचंद यदुवंशी शास्त्री अब तक विश्व के 18 देशों में हिन्दी साहित्य की अनेकानेक विद्याओं के कहानी, कविता, नाटक और उत्तर भारत के लोकनाट्य नौटंकी के विशेषज्ञ के रूप में जाने जाते हैं। उनकी साहित्य साधना समर्पण और भारतीय संस्कृति विश्व शिखर पर स्थापित करने के लिए अब तक विश्व के 15 देशों से अंतर्राष्ट्रीय सम्मान प्राप्त कर चुके हैं।
भूटान में अंतर्राष्ट्रीय सम्मान पाने की खबर से साहित्य व कला प्रेमियों के द्वारा उन्हें बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है जिनमें डॉ. रामा तक्षक (नीदरलैंड्स), डॉ. आनन्द गोस्वामी मायालु (नेपाल), डॉ. कपिल कुमार (बेल्जियम), डॉ. गोपाल मधु बघेल व डॉ . प्रमिला भार्गव (कनाडा), डॉ. अपर्णा वत्स व किरण वैद्य (ऑस्ट्रेलिया), राजेश चतुर्वेदी (दुबई), सुरेशचंद शुक्ल (नार्वे), डॉ. पुष्पा भारद्वाज (न्यूजीलैंड), डॉ. रमा शर्मा (जापान) के साथ साथ सुमन कुमार (उप निदेशक-नाटक संगीत नाटक अकादमी, नई दिल्ली) रमेश कुमार गौड़ (निदेशक राष्ट्रीय इंदिरा कला केन्द्र, नई दिल्ली),विपिन कुमार (निदेशक- बीएनए लखनऊ), रेनू रंग भारती (कार्यक्रम अधिशाषी – संस्कृति निदेशालय, लखनऊ) डॉ. अष्टभुजा मिश्रा (मुंबई), डॉ. मुकेश वर्मा सोनी (जयपुर),
,आल्हा गायक पंडित रामरथ पाण्डेय (लखनऊ), डॉ . एस. एस. अग्रवाल व सतीश शर्मा (आगरा),आशु कवि अनिल बौहरे, प्रदीप पंडित, देवी सिंह निडर, विजय सिंह प्रेमी, अजय कुमार गौड़, कवयित्री मीरा दीक्षित, प्रमिला गौड़, पंडित नथाराम गौड़ के प्रपौत्र राहुल गौड़, आशीष वी उपनीत गौड़ (हाथरस) आकाशवाणी के निवर्तमान निदेशक सर्वेश कुमार, दूरदर्शन के केंद्र प्रमुख सत्यव्रत सिंह, भगवताचार्य पंडित दामोदर शर्मा, लोक कलाकार ताराचंद प्रेमी, प्रकाश सिसौदिया, पंडित होतीलाल पाण्डेय, चौधरी रामहेत सिंह, विष्णु दत्त शर्मा, कृष्णा कुमारी माथुर, सरिता सिंह, चांद तारा, डॉ. दीपक गोस्वामी, डॉ. मुकेश पंडित, डॉ. शैल कुमारी गौतम, अशोक कुमार नीलेश, राकेश शर्मा, के नाम आदि प्रमुख हैं।

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