शिकागो से आए प्रशांत त्यागी ने 11वीं बार की गिरिराज जी की दंडवती परिक्रमा

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साधु सेवा भंडारे का आयोजन, संतों ने पटका पहनाकर और साफा बांधकर किया सम्मान

गोवर्धन (मथुरा)। सात समंदर पार अमेरिका के शिकागो में रहने वाले प्रशांत त्यागी की आस्था उन्हें एक बार फिर ब्रजभूमि खींच लाई। रविवार को उन्होंने 11वीं बार गिरिराज महाराज की दंडवती परिक्रमा कर विश्व शांति, भारत की सुख-समृद्धि और श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर भव्य मंदिर निर्माण की कामना की। इस अवसर पर साधु सेवा भंडारे का आयोजन भी किया गया। ब्रज के संत-महात्माओं ने पटका पहनाकर और साफा बांधकर उनका सम्मान किया।

विदेश में रहने के बावजूद प्रशांत त्यागी का ब्रजभूमि और भगवान श्रीकृष्ण के प्रति गहरा लगाव है। इसी आस्था के चलते वह बार-बार गिरिराज धाम पहुंचकर परिक्रमा और सेवा के माध्यम से अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हैं। इस बार भी उन्होंने अपनी साधना को विश्व कल्याण और देश की उन्नति के लिए समर्पित किया। साथ ही श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर भव्य मंदिर निर्माण के संकल्प के लिए तन-मन-धन से सहयोग करने की प्रतिबद्धता जताई।

संत दिनेश फलाहारी महाराज ने कहा कि विदेश में रहने वाले भारतीयों का अपनी संस्कृति, सनातन परंपराओं और आध्यात्मिक विरासत से जुड़े रहना प्रेरणादायक है। प्रशांत त्यागी की श्रद्धा से ब्रजभूमि और भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति का संदेश दूर-दूर तक पहुंचता है। ऐसे श्रद्धालु सांस्कृतिक परंपराओं को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

महामंडलेश्वर कृष्णानंद जी महाराज ने कहा कि भगवान के प्रति श्रद्धा और समर्पण की कोई सीमा नहीं होती। विदेश में रहकर भी अपनी धार्मिक परंपराओं से जुड़े रहना भारतीय संस्कृति की विशेषता है। प्रशांत त्यागी की परिक्रमा और सेवा का संकल्प दूसरे श्रद्धालुओं को भी धर्म और सेवा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।

बाबा रामदास जी महाराज ने उनकी आस्था की सराहना करते हुए दंडवती परिक्रमा को श्रद्धा, तपस्या और अटूट विश्वास का प्रतीक बताया। इस दौरान साध्वी राधानंद गिरि, साध्वी डॉ. कृष्णा प्रिया सहित करीब एक दर्जन संत-महात्मा मौजूद रहे।

संतों ने प्रशांत त्यागी के प्रयासों की सराहना करते हुए विश्व शांति, मानव कल्याण, भारत की समृद्धि और श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर भव्य मंदिर निर्माण की कामना की। गिरिराज महाराज की 11वीं दंडवती परिक्रमा और साधु सेवा भंडारे के माध्यम से प्रशांत त्यागी ने अपनी धार्मिक आस्था, सेवा भावना और ब्रजभूमि के प्रति समर्पण व्यक्त किया।

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