बैंक हड़ताल से ठप रहा कामकाज, हजारों करोड़ का लेनदेन प्रभावित

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दो सौ शाखाओं में नहीं खुला कामकाज, पीएनबी के सामने गरजे बैंककर्मी; सरकार को आंदोलन तेज करने की चेतावनी

मथुरा। पांच दिवसीय बैंकिंग समेत विभिन्न मांगों के समर्थन में यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (यूएफबीयू) के आह्वान पर शुक्रवार को जिले में बैंक हड़ताल का व्यापक असर रहा। करीब 200 बैंक शाखाओं में कामकाज पूरी तरह ठप रहा। बैंकिंग सेवाएं बंद रहने से हजारों करोड़ रुपये के लेनदेन प्रभावित हुए और ग्राहकों को भी परेशानी उठानी पड़ी।

हड़ताल के समर्थन में विभिन्न बैंकों के अधिकारी और कर्मचारी अपनी-अपनी शाखाएं बंद कर जंक्शन रोड स्थित चौकी बागबहादुर के सामने पंजाब नेशनल बैंक के बाहर एकत्र हुए। यहां बैंककर्मियों ने बैंक प्रबंधन संगठन आईबीए और वित्त मंत्रालय के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

सभा को संबोधित करते हुए यूएफबीयू के जिला संयोजक जगमोहन शर्मा ने कहा कि आठ मार्च 2024 के समझौते में पांच दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था लागू करने पर सहमति बनी थी, लेकिन करीब दो वर्ष बाद भी मामला वित्त मंत्रालय में लंबित है। कई बार केंद्रीय श्रमायुक्त से समय मांगने के बावजूद इसका निस्तारण नहीं किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि पीएलआई को लेकर बनी सहमति को भी कमजोर करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि बैंककर्मियों को मजबूर होकर आंदोलन के रास्ते पर जाना पड़ा है। मांगों का शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो 28, 29 और 30 सितंबर को फिर हड़ताल होगी। अक्टूबर में अनिश्चितकालीन हड़ताल का नोटिस भी बैंक प्रबंधन को दिया जा चुका है।

यूएफबीयू के संस्थापक संयोजक बामनजी चतुर्वेदी ने कहा कि बैंक अपने कारोबार से सरकार को हर वर्ष करोड़ों रुपये का लाभांश देते हैं। परंपरा रही है कि आईबीए और यूएफबीयू के बीच हुए समझौते वित्त मंत्रालय को भेजे जाते थे और सामान्यत: उन्हें स्वीकार कर लिया जाता था। अब समझौतों को वर्षों तक लंबित रखा जा रहा है। इससे बैंककर्मियों में आक्रोश स्वाभाविक है।

बैंककर्मियों ने सेवानिवृत्त कर्मचारियों की पेंशन संबंधी लंबित समस्याओं के समाधान, अधीनस्थ, क्लेरिकल और अधिकारी संवर्ग में रिक्त पदों पर भर्ती, भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता, स्टाफ वेलफेयर फंड बढ़ाने, स्थानांतरण नीति में सुधार, पदोन्नति की समयसीमा के युक्तिकरण और अगले द्विपक्षीय समझौते के लिए वार्ता जल्द शुरू करने की मांग की।

सभा की अध्यक्षता बामनजी चतुर्वेदी ने की और संचालन जगमोहन शर्मा ने किया।

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