संस्कृति विवि में पश्चिमी उप्र को बागवानी विकास केंद्र के रूप मेंविकिसित करने पर मंथन

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चित्र परिचयः संस्कृति विवि में आयोजित कार्यशाला में भाग लेने वाले शिक्षक, विद्यार्थी अतिथियों के साथ।


मथुरा। संस्कृति विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ एग्रीकल्चर द्वारा “पश्चिमी उत्तर प्रदेश को बागवानी विकास केंद्र के रूप में स्थापित करना” विषय को लेकर एक महत्वपूर्ण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में मुख्य
अतिथि राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड के प्रबंध निदेशक कपिल मीणा ने किसानों की आय बढ़ाने और पश्चिमी उत्तर प्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए फसल विविधीकरण के मह.त्व पर विशेष जोर दिया। विद्यार्थियों को लगन,
अनुशासन और दृढ़ संकल्प के साथ अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए प्रोत्साहित भी किया।
प्रबंध निदेशक कपिल मीणा ने किसानों को पारंपरिक गेहूं–धान की खेती से आगे बढ़कर बाजार की मांग और स्थानीय कृषि-जलवायु परिस्थितियों के अनुसार उच्च मूल्य वाली फल, सब्जी, फूल एवं अन्य बागवानी फसलों को अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बागवानी क्षेत्र में रोजगार सृजन, मूल्य संस्कृति विवि में पश्चिमी उप्र को बागवानी विकास केंद्र के रूप में विकिसित करने पर मंथनसंवर्धन,
उद्यमिता और सतत कृषि विकास की व्यापक संभावनाओं पर प्रकाश डाला।
उन्होंने आधुनिक तकनीकों, कुशल सिंचाई, संरक्षित खेती, फसल कटाई उपरांत प्रबंधन और बेहतर बाजार संपर्क को अपनाने की आवश्यकता बताई। श्री मीणा ने छात्रों को कृषि, बागवानी, उद्यमिता, अनुसंधान एवं सरकारी सेवाओं में
उभरते करियर अवसरों का लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने अपने बीएससी कृषि से भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) तक के प्रेरणादायक सफर को साझा करते हुए छात्रों को लगन, अनुशासन और दृढ़ संकल्प के साथ अपने
लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए प्रोत्साहित किया।
इस महत्वपूर्ण एक दिवसीय कार्यशाला में संस्कृति विवि के कुलपति डॉ. एम.बी. चेट्टी ने मुख्य अतिथि कपिल मीणा, विशिष्ठ अतिथि उप प्रबंध निदेशक राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड डा. विजय कुमार दोहरे का स्वागत करते हुए कहा कि
कृषि अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने तथा किसानों एवं युवा पेशेवरों के लिए नए अवसर सृजित करने में बागवानी का बड़ा योगदान है। इसी क्रम में डॉ. विजय कुमार दोहरे, उप प्रबंध निदेशक, राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड ने देश में बागवानी विकास को बढ़ावा देने में एनएचबी की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने किसानों, उद्यमियों एवं अन्य हितधारकों के लिए उपलब्ध विभिन्न सरकारी योजनाओं, वित्तीय सहायता एवं सहयोग तंत्र की जानकारी दी।
उन्होंने कोल्ड-चेन, पैक हाउस, भंडारण, ग्रेडिंग, प्रसंस्करण एवं मूल्य
संवर्धन जैसी सुविधाओं के महत्व को समझाया। छात्रों को बागवानी को नवाचार, उद्यमिता एवं व्यावसायिक विकास के एक महत्वपूर्ण क्षेत्र के रूप में देखने के लिए प्रेरित किया। दोनों वक्ताओं के संबोधन से प्रतिभागियों को पश्चिमी उत्तर प्रदेश को एक प्रमुख बागवानी विकास केंद्र के रूप में
स्थापित करने की संभावनाओं और अवसरों की महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त हुई।
कार्यशाला में वक्ताओं ने संस्कृति विवि के कुलाधिपति डॉ. सचिन गुप्ता के निरंतर मार्गदर्शन एवं सहयोग के लिए हार्दिक आभार व्यक्त किया। साथ ही
विश्वविद्यालय में शैक्षणिक उत्कृष्टता, अनुसंधान, नवाचार एवं सुदृढ़ उद्यमशीलता पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देने में डा. सचिन गुप्ता के महत्वपूर्ण योगदान की सराहना की। कार्यक्रम का समापन डॉ. कंचन कुमार सिंह, डीन, स्कूल ऑफ एग्रीकल्चर द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।
उन्होंने मुख्य अतिथि, राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड के विशिष्ट अधिकारियों, कुलपति, विभिन्न विभागों के डीन, संकाय सदस्यों एवं विद्यार्थियों की गरिमामयी उपस्थिति एवं महत्वपूर्ण योगदान के लिए आभार व्यक्त किया।

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