भक्ति, इतिहास और ब्रज संस्कृति में सराबोर ब्रज रज उत्सव

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सुजीत ओझा के भजनों पर भक्ति भाव से झूमा पूरा पंडाल, स्वप्निल रास्ते ने भारतीय इतिहास के गौरवशाली अध्यायों को मंच पर किया सजीव

मथुरा। ब्रज रज उत्सव में रविवार की संध्या भक्ति, संगीत, इतिहास और ब्रज संस्कृति के रंगों में सराबोर रही। पूरे दिन उत्सव स्थल पर उल्लास भरा माहौल रहा। पारंपरिक परिधानों में सजे कलाकार, स्थानीय हस्तशिल्प की दुकानें और ब्रज व्यंजनों की महक से वातावरण खुशनुमा हो गया।
धौली प्याऊ स्थित रेलवे मैदान पर उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद, पर्यटन विभाग और जिला प्रशासन के तत्वावधान में आयोजित ब्रज रज उत्सव में दोपहर के सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रंखला स्थानीय कलाकारों की प्रस्तुति से शुरु हुई। सर्वप्रथम सौरभ चतुर्वेदी ने शुद्ध शास्त्रीय शैली में ध्रुपद गायन प्रस्तुत कर मंच को सुरों से गुंजायमान किया। फिर मंच पर रामेन्द्र खुराना ने अपने साथी कलाकारों के साथ अपनी ओड़िसी नृत्य शैली में भारतीय नृत्य परंपरा की गंभीरता और सौंदर्य का परिचय दिया। तत्पश्चात कीर्ति बल्लभ पाठक ने भजन गायन से भक्ति रस की गंगा प्रवाहित की। संचालन दीपक गोस्वामी ने किया।
शाम होते-होते मंच पर भक्ति का रंग और गाढ़ा हो गया। अतिथि कलाकारों की श्रंखला प्रसिद्ध भजन गायक सुजीत ओझा के गायन से शुरु हुई। उन्होंने चलो मन वृंदावन की ओर भजन से अपने गायन की शुरुआत की। इसके बाद अनुपम माधुरी जोड़ी हमारे श्याम श्यामा की, माने चाकर रखो जी, कृष्ण उठत कृष्ण चलत, अधरम मधुरम और राधा घर कानन में राधा जैसे भजन प्रस्तुत कर जन समुदाय को भक्तिरस में सराबोर कर दिया। सुजीत ओझा के भजनों से पूरा पंडाल भक्ति भाव से झूम उठा।
इसके बाद मंच पर पहुंचे सुप्रसिद्ध कलाकार स्वप्निल रास्ते ने अपनी विशेष प्रस्तुति “हिस्टोरिकल एम्पायर्स ऑफ इंडिया” के माध्यम से भारतीय इतिहास के गौरवशाली अध्यायों को मंच पर सजीव किया। नृत्य, नाट्य और दृश्य तकनीक के सुंदर संगम से उन्होंने भारत की महान सभ्यताओं और वीरता की परंपरा को दर्शकों के सामने उतारा।

इस तरह ब्रज रज उत्सव में रविवार को दिनभर की यात्रा संगीत, नृत्य और भक्ति की मधुर लहरों से सराबोर रही। मंच के अलावा मेला स्थल पर लोक कलाकारों की झांकियां, पारंपरिक संगीत, मनोरंजन, खानपान और खरीदारी के बीच मौजूद जनसमुदाय ने इस सांस्कृतिक उत्सव में जमकर लुफ्त उठाया।

सोमवार की प्रस्तुति..
पद्मश्री मनोज जोशी का चाणक्य महानाट्य- शाम सात बजे

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