झुग्गी की गलियों में गूंजी खुशियां, नन्हीं कलाईयों पर सजीं राखियां

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जस्टिस फॉर चिल्ड्रन स्ट्रीट स्कूल निःशुल्क शिक्षा केंद्र ने बच्चों के साथ मनाया रक्षाबंधन
तिलक, राखी, मिठाई और नए वस्त्र पाकर खिल उठे बच्चों के चेहरे
मथुरा। किसी बच्चे की कलाई पर बंधी राखी सिर्फ धागा नहीं होती, वह रिश्ते, अपनत्व और खुशियों का एहसास होती है। लेकिन जब बचपन अभावों के बीच पल रहा हो, तब त्योहार की खुशियां भी कई बार उससे दूर रह जाती हैं। पन्ना पोखर की झुग्गी बस्ती में ऐसे ही बच्चों के बीच जब रक्षाबंधन पहुंचा, तो माहौल बदल गया—चेहरों पर मुस्कान थी, आंखों में चमक थी और छोटी-छोटी कलाईयों पर प्रेम की डोर सजी थी।
यह खूबसूरत दृश्य देखने को मिला जस्टिस फॉर चिल्ड्रन स्ट्रीट स्कूल निःशुल्क शिक्षा केंद्र, पन्ना पोखर, मथुरा में, जहां अभावग्रस्त एवं शिक्षा से वंचित बच्चों के साथ रक्षाबंधन का पर्व आत्मीयता और उल्लास के साथ मनाया गया।
बालिकाओं ने भाइयों के माथे पर तिलक लगाया और उनकी कलाई पर राखी बांधी। बच्चों को मिष्ठान खिलाया गया तथा नए वस्त्र प्रदान किए गए। उपहार मिलने की खुशी से बच्चों के चेहरे खिल उठे। कुछ देर के लिए झुग्गी बस्ती का यह निःशुल्क शिक्षा केंद्र पढ़ाई की जगह नहीं, बल्कि बचपन की खुशियों का एक जीवंत उत्सव बन गया।
सिर्फ शिक्षा नहीं, खुशहाल बचपन की भी पहल
जस्टिस फॉर चिल्ड्रन स्ट्रीट स्कूल निःशुल्क शिक्षा केंद्र केवल उन बच्चों तक किताबें पहुंचाने का माध्यम नहीं है, बल्कि उनके बचपन को सम्मान और खुशियों से जोड़ने की एक सतत पहल है।
सामाजिक एवं बाल अधिकार कार्यकर्ता तथा संस्था अध्यक्ष सतीश चंद्र शर्मा वर्ष 2008 से झुग्गी-झोपड़ियों, अभावग्रस्त परिवारों और मजदूर बस्तियों में रहने वाले बच्चों को शिक्षा, संस्कार एवं समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए निरंतर कार्य कर रहे हैं। इसी प्रयास के तहत बच्चों के साथ विभिन्न त्योहार एवं पर्व मनाए जाते हैं, ताकि आर्थिक परिस्थितियां उनके बचपन की खुशियों के रास्ते में दीवार न बनें।
एक राखी ने दिया बड़ा संदेश
रक्षाबंधन के इस आयोजन ने यह संदेश भी दिया कि बचपन किसी की आर्थिक स्थिति का मोहताज नहीं होना चाहिए। जिन बच्चों के जीवन में अभाव हैं, उनके हिस्से में भी त्योहार की खुशी, सम्मान और अपनापन आना चाहिए।
कार्यक्रम में सतीश चंद्र शर्मा, कुमारी कुमकुम, प्रीति राजपूत, सचिन कुमार, तनुज शर्मा सहित दर्जनों बच्चे उपस्थित रहे।
जस्टिस फॉर चिल्ड्रन स्ट्रीट स्कूल निःशुल्क शिक्षा केंद्र की यह पहल बताती है कि समाज में बदलाव हमेशा बड़े मंचों से नहीं आता—कभी-कभी वह एक छोटी-सी झुग्गी बस्ती में, एक बच्चे की मुस्कान और उसकी कलाई पर बंधी एक राखी से भी शुरू होता है।

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