गिर्राज पर्वत के स्वरूप में आज भी साक्षात विराजमान हैं योगीराज कृष्ण-स्वामी सुमेधानंद

बृज दर्शन

मथुरा। भगवान श्री कृष्ण गिर्राज पर्वत के स्वरूप में आज भी ब्रज में साक्षात विराजमान हैं। बाल लीलाओं में भगवान श्री कृष्ण ने गोपियों के माया रूपी चीर का हरण करके उन्हें अविध्या रूपी माया से मुक्त कर दिया था । जो गोवर्धन महाराज की पूजा करते भगवान श्री कृष्ण उनके कष्टों कष्ट हरण भी करती है।

गोवर्धन रोड स्थित स्टैंडर्ड रिसोर्ट में श्रीमद् भागवत महापुराण कथा के दौरान यह उद गार स्वामी सुमेधानंद महाराज के द्वारा व्यक्त किए गए। उन्होंने कहा कि भगवान श्री कृष्ण गिरिराज पर्वत के कण-कण में समाहित हैं और आज भी साक्षात भगवान श्री कृष्ण के स्वरूप में गोवर्धन पर्वत ब्रज में स्थित है भगवान श्री कृष्ण ने गिरिराज पर्वत की पूजा करके जिस तरह से समस्त ब्रज वासियों के कष्टों का हरण किया था उसी तरह आज भी अगर ब्रजवासी गिरिराज पर्वत की पूजा करते हैं तो उनके कष्टों का हरण भगवान श्रीकृष्ण स्वयं करते हैं ।उन्होंने कहा गिरिराज पर्वत सब देवों के मुकुट मणि है।जहां उनके चारों ओर संत समाज होती है और वह ब्रज के मुकुट मणि गिरिराज पर्वत के दर्शन हर पल खुले जहां कोई भी अपनी अरदास कभी भी लगा सकता है। सुमेधानंद जी ने कहा के बाल लीलाओं के दौरान भगवान श्री कृष्ण ने गोपियों के चीर हरण की लीला के दौरान उनके वस्त्रों का हरण तो महज एक दिखावा था परंतु अविद्या रूपी माया का हरण भगवान श्री कृष्ण ने किया था।महाराज लीला के दौरान मोर पख़ धारण बाल ब्रहमचारी का संदेश दिया जिसमे ऋषि मुनि व स्वय भगवान भोले नाथ गोपी रूप धारण कर के महरास लीला में शामिल हुए । उसी समय से उनका नाम gioi स्वर महादेव पड़ गया था ।जिसमें कृष्ण ऑर महादेव की शक्ति विराजमान है । भगवान श्री कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी उंगली पर धारण करके जिस प्रकार ब्रज वासियों की रक्षा की वही इंद्र के मान का मर्दन किया था । श्री कृष्ण की बाल लीलाएं एवं गोवर्धन पूजा के दौरान भक्त भावविभोर होकर भगवान श्री कृष्ण के प्रेम प्रसंगों में द्रवित हो गए । कथा पंडाल में भक्ति की धारा से लोगों की भावनाएं भक्ति मय हो गई।

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