महामानव राजा महेंद्र प्रताप को पुस्तकों में पढ़ाया जाए

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उप्र संस्कृति विभाग ने 135 वीं जयंती पर “राजा महेंद्र प्रताप का इतिहास में योगदान” विषयक संगोष्ठी का आयोजन कराया

समाजवादी विचारक हुकुम चंद्र तिवारी ने भारत रत्न देने की मांग उठाई

मथुरा। उत्तर प्रदेश संस्कृति विभाग के तत्वावधान में राजकीय संग्रहालय के सभागार में क्रांतिकारी एवं त्यागमूर्ति राजा महेंद्र प्रताप जी की 135 वीं जयंती मनाई गई।
संग्रहालय के सभागार में विषय “राजा महेंद्र प्रताप व्यक्तित्व एवं कृतित्व और इतिहास में योगदान” पर संगोष्ठी में राजा महेंद्र प्रताप को मरणोपरांत भारत रत्न देने की मांग उठाई गई।
संगोष्ठी में अध्यक्षता करते हुए करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता एवं पूर्व विधायक को हुकुम चंद्र तिवारी एडवोकेट ने कहा कि नई पीढ़ी को अपने बलदानियों और आजादी दिलाने वाले क्रांतिकारियों के इतिहास को नहीं भुलाना चाहिए। युवा वर्ग राजा महेंद्र प्रताप के बारे में यह जाने के 32 वर्ष विदेश में रहकर अंग्रेजों के खिलाफ उन्होंने किस तरह लड़ाई लड़ी थी ? राजा महेंद्र प्रताप एक मानव नहीं बल्कि महामानव थे। वह देश की स्वतंत्रता के लिए राजा से रंक हो गए। राजा साहब ने भारत की अशिक्षा एवं बेरोजगारी को दूर करने के लिए और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण हेतु प्रेम महाविद्यालय की पुत्रवत स्थापना कर अपना सर्वस्व देश के लिए न्यौछाबर कर दिया था ।
पूर्व विधायक प्रणतपाल सिंह ने संगोष्ठी में संकल्प व्यक्त किया कि वह मुख्यमंत्री एवं प्रधानमंत्री से मिलकर राजा साहब की याद में वृंदावन के मार्गों पर द्वार बनवाने का प्रयास करेंगे। उन्होंने राजा साहब के क्रांतिकारी व्यक्तित्व पर विस्तृत जानकारी दी।


कांग्रेस विधानमण्डल के पूर्व नेता एवं पूर्व विधायक प्रदीप माथुर ने अपने उद्बोधन में कहा कि राजा साहब ने भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में महात्मा गाँधी , पंडित जवाहर लाल नेहरू एवं नेताजी सुभाष चंद बोस का मार्गदर्शन किया था । यह हम सभी के लिए गौरव की बात है कि जिस तकनीकी शिक्षा की चर्चा इक्कीसवीं सदी में हो रही है, उस तकनीकी शिक्षा का प्रादुर्भाव राजा साहब ने अपनी दूरदर्शिता से सन 1909 में प्रेम महाविद्यालय की स्थापना करके किया।
प्रेम महाविद्यालय इण्टर कॉलेज वृंदावन के प्रधानाचार्य देव प्रकाश शर्मा ने विषय का प्रवर्तन करते हुए मांग की कि राजा साहब को भारत रत्न मिले। साहब के जीवन चरित्र को पाठ्यक्रम में सम्मिलित किया जाए। राजा साहब द्वारा अपने राजमहल में सन 1909 में स्थापित प्रेम महाविद्यालय इण्टर कॉलेज का जीर्णोद्धार कराया जाए। राजा साहब की समाधि का विश्वस्तरीय सौंदर्यीकरण एवं राजा साहब के नाम से प्रवेश द्वार बनाये जाएं । संगोष्ठी के समन्वय समन्वयक चंद्र प्रताप सिंह सिकरवार ने कहा कि राजा महेंद्र प्रताप से युवा पीढ़ी परिचित हो, इसी ध्येय से नगर के डिग्री कॉलेजों के छात्र- छात्राओं को उनके जीवन से अवगत कराया गया है। राजा साहब की 135 वीं जयंती पर जनपद के समस्त विद्यालयों में चित्रकला प्रतियोगिता कराई जा रही है।
संगोष्ठी में साहित्यकार डॉ अनीता चौधरी ने कहा कि राजा महेंद्र प्रताप जितने महान व्यक्तित्व थे, उस नजरिए से इतिहास ने उनके साथ नाइंसाफी की है। वह 32 वर्ष विदेश में रहकर अंग्रेजों से लड़ाई लड़ते रहे। उन्होंने अपना सब कुछ त्याग कर समाज को दे दिया। उनका जीवन चरित्र किताबों में पढ़ाया जाए।
संगोष्ठी में वरिष्ठ अधिवक्ता नरेन्द्र सिंह एडवोकेट, धर्म सिंह चौधरी एडवोकेट, भाजपा किसान मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष हीरा सिंह वरिष्ठ नाट्यकर्मी खेमचंद यदुवंशी , डॉ अनीता ने राजा महेंद्र प्रताप के व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डाला।
इससे पूर्व समाजसेवी आरवी चौधरी, उपेंद्र त्रिपाठी पत्रकार, आईओसी के रिटायर्ड अधिकारी भगवान सिंह वर्मा, के आर गर्ल्स डिग्री कॉलेज की प्रोफ़ेसर निधि शर्मा आदि ने राजा साहब के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया। आभार समन्वयक चंद्र प्रताप सिंह ने जताया।
इस मौके पर श्रीमती यमुना चौधरी एडवोकेट , श्रीमती कविता सक्सेना , श्री निखिल अग्रवाल , प्रो अशोक सारस्वत , श्री उपेंद्र त्रिपाठी , श्री शिव अधार सिंह यादव , श्री अजय कुमार मौर्य , डॉ खुशबू भारती , श्री डॉ सोमकान्त त्रिपाठी , कु सुमन रानी , श्री प्रदीप गौतम , कु आकांक्षा वर्मा , कु पूनम सिंह , श्री अशोक वर्तमा , श्री सुनील कुमार वर्मा आदि मौजूद रहे
राजकीय संग्रहालय मथुरा के उपनिदेशक डॉ यशवंत सिंह राठौड़ के निर्देशानुसार समस्त स्टाफ ने अति उत्तम व्यवस्था देते हुए आये हुए अतिथियों, यार गर्ल्स कॉलेज केआर कॉलेज और चंपा अग्रवाल के विद्यार्थियों अतिथियों का सम्मान किया।

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