नृत्यांगना पद्मश्री डॉ. गुलाबो सपेरा और उनके समूह ने अपनी प्रस्तुतियों से बाँध दिया समां

मथुरा। ब्रज रज उत्सव के छठवें दिन की शाम दूरदर्शन एवं आकाशवाणी के नाम रही। रंगारंग लोकसंगीत एवं नृत्य संध्या में ब्रज संस्कृति से जुड़े लोकगीतों और नृत्यों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद, पर्यटन विभाग और जिला प्रशासन द्वारा आयोजित ब्रज रज उत्सव में शुक्रवार को
कार्यक्रम का शुभारंभ बुंदेलखंड (मध्य प्रदेश) के सागर निवासी डॉ. जुगल किशोर नामदेव एवं उनके दल ने बधाई, नौरता और देवारी नृत्य की मनमोहक प्रस्तुतियों से किया। उनकी प्रस्तुतियों में ब्रज संस्कृति के मूल तत्त्व — राधा–कृष्ण की लीलाएँ, प्रकृति प्रेम और लोक आस्था की झलक दिखाई दी। बधाई गीत में भारतीय संस्कृति के मूलाधार राम–कृष्ण का चित्रण था, जबकि नौरता और देवारी नृत्य में उपासना और लोक जीवन की सहज भावनाएँ प्रमुख रहीं।
इसके बाद मंच पर राजस्थान की मरुधरा से आईं ख्यातिप्राप्त लोकगायिका एवं नृत्यांगना पद्मश्री डॉ. गुलाबो सपेरा और उनके समूह ने अपनी प्रस्तुतियों से समां बाँध दिया। यूनेस्को द्वारा संरक्षित कालबेलिया नृत्य के साथ-साथ घूमर, चरी, निंबूड़ा और भवाई जैसे राजस्थानी लोक नृत्यों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

दूरदर्शन और आकाशवाणी मथुरा के इस संयुक्त आयोजन में राजस्थान और बुंदेलखंड के कलाकारों ने अपने-अपने लोक जीवन और सांस्कृतिक परंपराओं के माध्यम से ब्रज एवं भारतीय संस्कृति के मूल तत्वों को गीत–संगीत में पिरोकर प्रस्तुत किया।
इससे पूर्व दोपहर के कार्यक्रमों की श्रंखला में चेतना शर्मा ने अपनी कत्थक नृत्य प्रस्तुति से उत्सव को शास्त्रीय रंग दिया। दानी शर्मा की टीम ने पारंपरिक चरकुला नृत्य एवं गायन की प्रस्तुति दी, जबकि सरिता शर्मा ने लोक नृत्य और कत्थक नृत्य के माध्यम से मंच को जीवंत किया।
सभी कलाकारों को मुख्य अतिथि बलदेव के विधायक पूरन प्रकाश, ब्रज तीर्थ विकास परिषद के एसीईओ मदन चंद्र दुबे, डिप्टी सीईओ सतीश चंद्र, सहायक अभियंता आरपी यादव,अभियांत्रिकी प्रमुख आकाशवाणी वेदप्रकाश, कार्यक्रम प्रमुख दूरदर्शन सत्य व्रत सिंह, कार्यक्रम अधिकारी ओमप्रकाश सिंह, कार्यक्रम प्रमुख आकाशवाणी विजय कुमार सिंह नौलखा तथा सहायक अभियंता पूर्ण मल मीणा द्वारा डॉ. दीपक गोयल की अध्यक्षता में पटुका पहनाकर सम्मानित किया गया।

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नगरी हो अयोध्या सी रघुकुल सा हो घराना
साधो बैंड के स्वरों में गूंजे भक्ति गीत

मथुरा। ब्रज रज उत्सव के छठवें दिन की अंतिम प्रस्तुति में साधो बैंड ने अपने भक्ति गीतों से ऐसा वातावरण रचा कि पूरा परिसर आध्यात्मिक भावों से सराबोर हो गया।
बैंड की प्रस्तुतियों में लोक और आधुनिक वाद्यों का अद्भुत संगम देखने को मिला, जिसने दर्शकों के दिलों को छू लिया। कार्यक्रम की शुरुआत लम्बे इंतजार के बाद प्रसिद्ध गीत नगरी हो अयोध्या सी रघुकुल सा हो घराना से की। इसके बाद ब्रज भूमि में राधा का स्मरण करते हुए राधा गोरी गोरी बरसाने की छोरी प्रस्तुत करते हुए राम के साथ कृष्ण भक्ति के स्वर गुंजने लगे। इसके बाद एक बार फिर राम पर लौटते हुए अपने प्रसिद्ध गीत रामा रामा करते बीती री उमरिया से दर्शकों में जोश भरने का काम किया। इसके बाद तो एक के बाद एक भजनों पर श्रोताओं ने तालियों की गड़गड़ाहट से उत्साह प्रकट किया।
साधो बैंड के गायन में प्रेम, भक्ति और एकत्व का संदेश झलकता रहा। उनकी भक्ति धुनों ने ऐसा रस घोला कि उपस्थित जनसमूह देर तक “राधे–श्याम” के जयघोष करता रहा और वातावरण भक्ति भाव से भर गया।