अमृत महोत्सव में क्रांतिकारी राजा नाहर सिंह के स्वांग का मंचन

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नाट्य मंचन के जरिए ब्रज के क्रांतिकारियों के इतिहास को सामने ला रहा उत्तर संस्कृति विभाग

मथुरा। ब्रज ‘संस्कृति केन्द्र मथुरा के कलाकारों द्वारा संस्कृति विभाग उत्तर प्रदेश और उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी के आमंत्रण पर आजादी के अमृत महोत्सव एवं चौरा- चौरी शताब्दी महोत्सव के अंतर्गत पांच दिवसीय ‘अमृत रंग उत्सव’ के समापन अवसर पर उत्तर प्रदेश सङ्गीत नाटक अकादमी के गोमती नगर लखनऊ स्थित संत गाडगे प्रेक्षागृह में ‘भगत-सांगीत नौट॔की- शहीद राजा नाहर सिंह’ का मंचन किया गया। इसका लेखन संगीताचार्य डॉ खेमचंद यदुवंशी ने किया।
कार्यक्रम का शुभारम्भ मुख्य अतिथि प्रदेश के लोकायुक्त जस्टिस एस.सी. वर्मा, संस्कृति विभाग के विशेष सचिव आईएएस आनंद कुमार, संस्कृति विभाग उत्तर प्रदेश के कार्यक्रम अधिशासी- कमलेश कुमार पाठक, अकादमी की अध्यक्ष- डॉ. पूर्णिमा पाण्डेय व अकादमी के सचिव- तरुण राज व मथुरा के वरिष्ठ पत्रकार चन्द्रप्रताप सिकरवार द्वारा दीप प्रज्वलन से हुआ।

मुख्य अतिथि जस्टिस एस. सी. वर्मा ने बताया – “बचपन में हम कड़कड़ाती हुई ठंड में रजाई ओढ़कर दूर दूर तक नौटंकी देखने जाते थे क्योंकि नौटंकी के सांगीत में अद्भुत जादू होता है, इस जादू को हमें यथावत बनाये रखना है।“ इसी क्रम में उत्तर प्रदेश के शासन के विशेष सचिव आईएएस आनन्द कुमार ने स्पष्ट किया- “ यह लोकनाट्य आज भी उतना ही दमदार है जितना यह प्राचीनकाल में था,आज भी इसे देखने जनता खिंची चली आती है।“
डा. खेमचन्द यदुवँशी ने कहा कि शहीद राजा नाहर सिंह के साथ साथ ब्रज के राजा महेंद्र प्रताप सिंह, महाराज सूरजमल, गोकुला जाट जैसे अनेक जाट समुदाय के लोगों द्वारा आजादी के लिए दिए गए बलिदानों से नई पीढ़ी को परिचित कराना हमारा परम् कर्तव्य है।“
स्वाग शैली में डॉ. खेमचन्द यदुवँशी (रंगाचार्य व मेज़र हॉडसन), मास्टर पुत्तन लाल हाथरसी (राजा नाहर सिंह), लता रानी (रानी किशन कौर),जान्हवी पाण्डेय- राजनर्तकी, चाँद तारा (गुलाबो), निरंजन सिंह (सूबेदार हीरा सिंह),मदन लाल टनाटन (जमीदार पलटू सिंह),भजन सिंह (अंग्रेज दूत),चाँद खान- गुप्तचर भूरा सिंह,ऋतुराज यदुवँशी- (युवराज कुशल सिंह),राम प्रकाश शर्मा (सेनापति गुलाब सिंह सैनी),विजय सिंह (जल्लाद), अभिनव उपाध्याय, अथर्व उपाध्याय, रत्नेश त्रिपाठी, स्वस्तिक उपाध्याय (अंग्रेज सैनिक) आदि प्रमुख थे।
संगत कलाकार वासुदेव नागर, इब्राहिम खान व मुकेश शर्मा ने बेहतर तालमेल के साथ संगत प्रदान की।
रूप सज्जा-ललिता यदुवँशी, वस्त्र-विन्यास- ऋतुराज यदुवँशी,वस्तु विन्यास-कुँवर प्रद्युम्न यदुवँशी का रहा तथा वरिष्ठ पत्रकार चन्द्रप्रताप सिकरवार ने सह निर्देशन का कार्यभार सम्हाला।

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