
मथुरा/वृंदावन। रमणरेती मार्ग स्थित फोगला आश्रम के श्रीजी सदन में दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय मैथिली सम्मेलन का मंगलवार को शोभायात्रा के साथ शुभारंभ हो गया। शोभायात्रा ठा. बांकेबिहारी मंदिर से प्रारंभ होकर मुख्य मार्गों से होते हुए कार्यक्रम स्थल पर पहुंची। वहीं शाम को मैथिली अधिकार दिवस के रूप में आयोजित संगोष्ठी में वक्ताओं ने कहा कि मैथिल समाज का भारतीय संस्कृति में अहम योगदान है।
मुख्य अतिथि प्रदेश के ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा ने कहा कि मिथिला का भारतीय संस्कृति में राजा रामचंद्र के समय से अहम योगदान है। कहा कि ब्रज संस्कृति और मिथिला संस्कृति का भी अदभुत संगम है। कहा कि मिथिला एवं ब्रजभूमि के पुरातन संबंधों को और भी मधुर एवं प्रगाढ़ बनाने के लिए ब्रज-मैथिली अकादमी की स्थापना के प्रयास को तेज किया जाएगा। सम्मेलन संरक्षक एवं चीफ इंजीनियर विद्युत अजय कुमार चैधरी ने कहा कि आज मिथिला एवं मैथिली की संस्कृति में अदभुत दिन है। क्योंकि आज के दिन ही मैथिली को संविधान में स्थान मिला था। संत गोविंदानंद तीर्थ ने जनक नन्दिनी सीता की जन्मभूमि मिथिला को निराकार ब्रह्म को साकार करने वाली धरती बताया। कहा कि मिथिला भूमि ज्ञान व प्रेम के समन्वय का जीता जागता प्रमाण है। दरभंगा के सांसद गोपाल ठाकुर ने कवि कोकिल विद्यापति के कृतित्व एवं व्यक्तित्व की चर्चा करते हुए विधान सभा, विधान परिषद एवं संसद भवन में उनका चित्र लगाए जाने की बात उठाई। इससे पूर्व सुबह ठा. बांके बिहारी मंदिर से कार्यक्रम स्थल तक मैथिल परिधान में शोभा यात्रा निकाली गई। शोभायात्रा का जगह-जगह पुष्पवर्षा कर स्वागत किया गया। स्वागताध्यक्ष गंगाधर पाठक ने अतिथियों का स्वागत किया।

इन्हें मिला मिथिला रत्न सम्मान
कार्यक्रम में संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल विभिन्न भाषाओं में उत्कृष्ट योगदान देने वाले साहित्यकारों के साथ-साथ कला संस्कृति, पत्रकारिता एवं अन्य विधाओं में बेहतर कार्य करने वाले लोगों को मिथिला रत्न सम्मान से सम्मानित किया गया। बैंकिंग सेवा क्षेत्र के लिए नीकेश्वर दत्त शर्मा, डिफेंस क्षेत्र में कैलाश पाठक, समाज सेवा के क्षेत्र में यतेद्रमोहन झा, भुवनेश्वर शर्मा, इंद्रमणि पाठक, वीरेंद्र कुमार शर्मा, रमेश चंद्र शर्मा, मैथिली काव्य के क्षेत्र में बेहतर कार्य करने वाले हरिश्चंद्र हरित, कला एवं संस्कृति के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाली डॉ सुषमा झा, हिंदी साहित्य के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने के लिए डॉ प्रभाकर पाठक एवं डॉ अमरकांत कुमर, गायन के क्षेत्र में दुखी राम रसिया एवं ओम प्रकाश सिंह, संस्कृत साहित्य के क्षेत्र में बेहतर कार्य करने वाले डॉ रामसेवक ठाकुर आदि को मिथिला रत्न सम्मान से सम्मानित किया गया।

उपस्थिति
महंत फूलडोलबिहारी दास, महासचिव डॉ बैद्यनाथ चौधरी बैजू, चेतना समिति के अध्यक्ष विवेकानंद झा, महात्मा गांधी शिक्षण संस्थान के हीरा कुमार झा, अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के अध्यक्ष डॉ महेंद्र नारायण राम, मणिकांत झा, प्रो. जीवकांत मिश्र, प्रो. विजयकांत झा, प्रवक्ता प्रवीण कुमार झा, चन्द्रशेखर झा बूढाभाई, विनोद कुमार झा, एक्सईएन राजीव कालरा, एसडीओ सचिन द्विवेदी, एसडीओ विकास शर्मा, राजीव सिंह, शिवनारायण अरोरा आदि भी उपस्थित थे।