
मथुरा। सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस सिम्स हॉस्पिटल में एक वर्ष से रीढ़ की हड्डी और पैरों में दर्द व चलने फिरने में दिक्कत से जूझ रही अफशाना का मिनीमली इंवेसिव न्यूरो सर्जन डा.एस.के. गुप्ता और उनकी अनुभवी टीम ने अथक परिश्रम द्वारा दूरबीन विधि द्वारा सफल ऑपरेशन किया। 24 घण्टे में कविता अपने पैरों पर खड़े होकर चलने लगी तथा कमर तथा पैरों का दर्द बिल्कुल ठीक हो गया।
इस अवसर पर सिम्स हॉस्पिटल के न्यूरो साइंसेस विभाग के वरिष्ठ सलाहकार डा. एस.के. गुप्ता ने कहा कि अफशाना की एल-5, एस-1 डिस्क दबी हुई थी, जिससे कमर में अत्यधिक दर्द हो रहा था और इन्हें टेड़ा होकर चलना पड़ता था, जिससे थोड़ा चलने में बहुत दिक्कत होती थी। इनकी रीढ़ का दर्द कमर से होकर पैरों में आता था। इनका हमने एंडो पोर्टल माइक्रो डिसेक्टमी किया है। अब ये पूरी तरह से स्वस्थ हैं, इनका पैर और दर्द सब बिल्कुल ठीक हो गया है। अब इनको चलने-फिरने में कोई दिक्कत नहीं है और ये अब अपने दैनिक कार्य कर पाती है। ये जो मिनिमली इंवेसिव स्पाइन सर्जरी है, इसके सबसे प्रमुख फायदे यही है कि मरीज की रिकवरी बहुत तेजी से होती है, वो जल्दी से चलने लगता है, ब्लड लॉस नहीं होता है, चीरा बहुत छोटा लगता है, इंफेक्शन का कोई खतरा नहीं होता है और मरीज पहले जैसा हो जाता है। मिनीमली इंवेसिव स्पाइन सर्जरी पहले महानगरों में ही होती थी लेकिन अब सिम्स हॉस्पिटल में बहुत किफायती दरों पर यह सुविधा उपलब्ध है।
इस अवसर पर सिम्स हॉस्पिटल के चेयरमैन डॉ. गौरव भारद्वाज ने कहा कि मस्तिष्क एवं रीढ़ की हड्डी से जुड़ी सभी बीमारियों का विश्वस्तरीय इलाज सिम्स हॉस्पिटल में उपलब्ध है। यहाँ मिनिमली इंवेसिव न्यूरो सर्जन डा .एस. के. गुप्ता दिन-प्रतिदिन नित नये आयाम स्थापित कर रहे हैं। इनके साथ ही यहां न्यूरो साइंसेस विभाग में न्यूरोलॉजिस्ट डा. नीलेश गुप्ता, वरिष्ठ न्यूरोसर्जन डा. प्रेम पाल भाटी भी मरीजों को विश्वस्तरीय इलाज प्रदान कर रहे हैं। सिम्स हॉस्पिटल में एक ही छत के नीचे सभी बीमारियों का बेहतरीन इलाज उपलब्ध है।