काव्य के कल्प थे सुकवि जगदीश लवानिया
हाथरस। काव्य के कल्प वृक्ष की अब कल्पना भर ही रह गई है। क्योंकि सुकवि डा जगदीश लवानियां के स्वर्गवास होने पर काव्य जगत की अपूर्तिनिय क्षति हुई है।यह उद्गार व्हट्ऐप श्रद्धांजलि सभा का संचालन करते हुए आशु कवि अनिल बौहरे ने व्यक्त किये।व्हट्ऐप श्रद्धांजलि सभा मुख्य रूप से डाॅ. आरके भटनागर आईएएस (अध्यक्ष काका […]
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