-जीएलए बायोटेक के विशिष्ट प्रोफेसर ने अपने द्वारा संपादित किताबों में जैविक खेती को बढ़ावा देने पर दिया जोर
मथुरा। कोरोना महामारी के दौर ने हम सभी को एक जगह स्थिर कर दिया है। ऐसी स्थिति में माइक्रोबायोलाॅजी एवं बायोटेक्नोलाॅजी की उपलब्धता/उपयोगिता और बढ़ गई है। बायोटेक्नोलाॅजी विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी ही महामारी पादपों के लिए भी नुकसानदायी साबित हो सकती है। इसी को ध्यान में रखकर कृषि क्षेत्र में नए रिसर्च हेतु जीएलए विश्वविद्यालय, मथुरा के बायोटेक विभाग के विशिष्ट प्रोफेसर डाॅ. एचबी सिंह ने अपने द्वारा संपादित पुस्तकों में सूक्ष्म जीवों के उपयोग से जैविक खेती को बढ़ावा देने पर जोर दिया है।
जीएलए के विशिष्ट प्रोफेसर डाॅ. एचबी सिंह द्वारा संपादित पुस्तक बायोफर्टिलाइजर्स एडवांस इन बायो-इनोक्यूलेंट्स, फाइटोमाइक्रोबायोम इंटरेक्शन एंड सस्टेनेबल एग्रीकल्चर जैसी दो और पुस्तकें संपादित की गई हैं, जो कि अंतर्राष्ट्रीय विख्यात प्रकाशक विले, स्प्रिंगर और एल्सवायर में प्रकाशित हो चुकी हैं। प्रो. एचबी सिंह ने अपने द्वारा संपादित पुस्तकों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इन पुस्तकों के माध्यम से भारत सहित विभिन्न देशों में सूक्ष्मजीवों के उपयोग से जैविक खेती को बढ़ावा देना है।
उन्होंने बताया कि कृषि उपयोगी सूक्ष्म जीवों के अनुसंधान, विकास और खेती के उपयोग के बारे में सटीक जानकारी दी गयी है। कृषि में नैनो उर्वरकों और नैनो कीटनाशकों के उपयोग को सतत् कृषि विकास के लिए एक स्मार्ट डिलीवरी प्रणाली के बारे में बताया है। साथ ही बदलते जलवायु से उत्पन्न कृषि के तनावों (जैविक एवं अजैविक) के बारे में कृषि की उत्पादकता को बढ़ाने पर जोर दिया गया है।
जीएलए के प्रोफेसर डाॅ. एचबी सिंह द्वारा संपादित एवं प्रकाशित पुस्तकों पर हर्ष व्यक्त करते हुए जीएलए के डीन एकेडमिक प्रो. अनूप कुमार गुप्ता एवं डीन रिसोर्स प्लानिंग एंड जनरेशन डाॅ. दिवाकर भारद्वाज ने कहा कि इन पुस्तकों के माध्यम से किसान शोधकर्ता एवं कृषि वैज्ञानिकों को जैव कीटनाशक पर हो रहे नये शोधों और उनके उपयोग करने के लिए तरीकों के बारे में जानकारी मिलेगी।
जीएलए बायोटेक के विभागाध्यक्ष प्रो. शूरवीर सिंह ने कहा कि वर्तमान समय में प्रकृति भी अपना नया रूप धारण कर रही है और ऐसी महामारियों का जन्म हो रहा है, जो कि इंसानों सहित पादपों के लिए घातक है। ऐसी बीमारियों से बचने के लिए आज के समय बायोटेक्नोलाॅजी और माइक्रोबायोलाॅजी के स्कोप का स्तर भी बढ़ा है। उन्होंने बताया कि जीएलए में विभिन्न बायोटेक लैबों पर शोध को बढ़ावा देने पर जोर दिया जा रहा है। साथ ही छात्रों को भी इसके प्रति जागरूक कर रहे हैं।