मथुरा। यमुना शुद्धि की मुहिम के लिए समर्पित यमुना मिशन किसी परिचय का मोहताज नहीं। प्लास्टिक कचरे में भी पौधे लगाने लगाने और उन्हें फलीभूत कर दिखाने की जो तकनीक यमुना मिशन ने दिखाई है, वह पूरे विश्व के लिए अजूबा ही है। इससे पहले प्लास्टिक कचरे में पौधरोपण की बात कपोल कल्पना ही नजर आती थी। इस बारे में यमुना शुद्धि संकल्प पदयात्रा के दौरान यमुना मिशन के संस्थापक प्रदीप बंसल से बातचीत हुई तो उन्होंने यमुना मिशन के वर्तमान कार्यों और भविष्य की योजनाओं पर प्रकाश डाला।
यमुना मिशन के संस्थापक प्रदीप बंसल ने कहा कि प्लास्टिक के कचरे में पौधरोपण की पूरे विश्व में यह नयी तकनीक है। यमुना किनारे पौधे लगाकर प्रकृति संरक्षण का उल्लेखनीय कार्य करने के संबंध में उन्होंने कहा कि हमारा एक ही लक्ष्य है, यमुना मिशन। इसके अलावा और कोई दूसरा नहीं है। हमारा काम अलक्ष्य है। यानि हमारी कोई योजना नहीं है, जो-जो काम सामने आते हैं, उन्हें हम करते जाते हैं।
सरकारी विभागों की ओर से सहयोग के प्रश्न पर उन्होंने कहा कि यमुना मिशन के कार्यों में सरकारी तंत्र की ओर से कोई अड़चन नहीं होती, यही सबसे बड़ा सहयोग है। खासकर कि नगरनिगम के सभी अधिकारियों और पार्षदों का पूरा सहयोग मिल रहा है। व्यक्तिगत रूप से सभी जिम्मेदार लोग यमुना शुद्धि के लिए आगे आ रहे हैं।
अपने इस अभियान की प्रेरणा के संबंध में उन्होंने कहा कि पेड़ लगाना हमारे डीएनए में है। हमने गोवर्धन में सबसे पहले वृक्षारोपण किया। उन्होंने कहा कि शुद्ध अंत:करण से यदि लोग पेड़ लगाएं, तो वे बहुत जल्दी फलीभूत होते हैं।
उन्होंने कहा कि जब तक देश के बड़े बड़े नीति निर्माताओं को यह समझ नहीं आएगा कि प्राचीन नदियों के संरक्षण के लिए शहरों को किस तरह बसाया जाए, नालों का क्या प्रबंध किया जाए, तब तक प्रयास सफल नहीं होंगे। इसके अलावा जनजागरुकता भी जरुरी है।
हर व्यक्ति बड़े पैमाने पर यमुना में अशुद्धि का कारण बन रहा है। यदि हर व्यक्ति गंदगी को दूर करने के प्रति जागरुक होगा, तभी यमुना शुद्धिकरण होगा।