मथुरा। ब्रज में भक्ति भाव के कारण ही भगवान श्री कृष्ण ने जन्म लिया था ब्रज के कण कण में योगीराज व्याप्त है। सखा भाव में भगवान जल्दी प्रसन्न होते है । संतो ऑर बडो का अपमान ऑर निरादर करते है वो लोग धन हीन हो जाते है।

गोवर्धन रोड स्थित त्रिवेणी कोमपेक्स में आयोजित श्रीमद भागवत कथा के दौरान स्वामी सुमेधानंद महाराज ने कहा भगवान ने ब्रजवासियों में भक्ति भाव देखा इसी कारण उन्होंने ब्रज में जन्म लिया । ब्रज के कण कण में भगवान योगीराज आज भी व्याप्त है।सखा भाव में भगवान सभी मर्यादाओं तो तोड़कर भक्त के बस में हो जाते है।सखा भाव में भगवान ने अपने मित्र सुदामा के लिए सभी मर्यादाओं को तोड़कर राजभवन में सुदामा चरण धोए।उन्होंने कहा महाभारत युद्ध में भगवान श्री कृष्ण ने युद्ध में शस्त्र धारण नहीं करने की प्रतिज्ञा ली थी।परंतु जब उनके सखा अर्जुन की जान को खतरा लगा तो उन्होंने खुद चक्र धारण करके भीष्म पिता मह पर बार करने की कोशिश की। सखा भाव में भगवान अपनी मर्यादाओं को तोड़कर भक्त के बसिभूत हो जाते है।ब्रज की हर लीला में भगवान ने हम सब को सीख दी है। जिन जिन ने संतो ऋषियों ऑर अपने बड़े लोगों का निरादर किया है वो धन हीन ऑर बुध्दि हीन हुए है। भक्ति में भाव जब मन में प्रगट होता है तो भगवान भी वही प्रगट हुए है। मीरा की भक्ति में भाव था। इसी कारण वो विश को पीकर भी जीवित रही। ब्रज की गोपीकाओं में को भक्ति का भाव था। इसी कारण महारास के दौरान हर गोपी के साथ भगवान श्री कृष्ण प्रगट हुए और लीला की। भक्ति भाव जहा होता है वहां भगवान भी होते है।
