वंदे मातरम न बोलने वालों के लिए फांसी की सजा के कानून की साधु संतों ने की मांग

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मथुरा। वर्तमान में चल रहे संसद के शीतकालीन सत्र में कानून लाया जाए, जिसमें वंदे मातरम के विषय में कड़े प्रावधान सुनिश्चित हो, इसको लेकर आज
दिनेश फलाहारी महाराज ने
प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर मांग की है। इसके तहत अब
वंदे मातरम नहीं बोलने वालों की मुश्किलें अब बढ़ती हुई नजर आ रही है।

श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर केस के मुख्य याचिकाकर्ता दिनेश फलाहारी महाराज ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखा है और मांग की है कि हिंदुस्तान में रहने वाला हर व्यक्ति चाहे वह किसी भी धर्म या संप्रदाय का हो वह व्यक्ति, यदि वंदे मातरम नहीं बोलता है तो समझ लेना चाहिए , उसके मन में राष्ट्र प्रेम की भावना नहीं है, वह कभी भी देश से गद्दारी कर सकता है,ऐसे व्यक्ति को देश द्रोही मान कर देश निकाला अथवा फांसी का प्रावधान किया जाना चाहिए ,इस नए कानून से भारतवर्ष की संप्रभुता मजबूत होगी तथा देश में छुपे गद्दारों का मनोबल रसातल में पहुंच जाएगा, उन्होंने प्रधानमंत्री जी को हिंदुओं का हृदय सम्राट बताया और कहा है कि देश के गद्दारों के लिए चीन जैसे कठोर कानून बनाने होंगे । पाकिस्तान में भी उनके राष्ट्रीय गीत,कौमी तराना, नहीं गाने वालों पर पाकिस्तान सरकार जुल्म एवं मुकदमा चलाकर कार्यवाही करती है ,सिंध एवं बलूचिस्तान में इसको लेकर 2007 में पाकिस्तान की फौज ने नरसंहार किया था। इंडोनेशिया, चीन, ऑस्ट्रेलिया, एवं खाड़ी देशों में कड़े कानून है तो फिर हमारे देश में ही गद्दारों को प्रोत्साहित क्यों किया जाता है ।पहले कांग्रेस सरकार ने मुस्लिम परस्त होकर देश में लचीले कानून बनाए हैं जो अब बर्दाश्त नहीं किया जा सकते। फलाहारी महाराज ने पत्र में लिखा है कि वंदे मातरम वही बोल सकता है जिसके दिल में हिंदुस्तान बसता हो और जिसके दिल में पाकिस्तान छुपा है ,वह वंदे मातरम नहीं बोलेगा।पहचान छुपा कर रहने वाले अवैध घुसपैठिये, बांग्लादेशी और पाकिस्तानी समर्थक वंदे मातरम् नहीं बोल सकते हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री को पत्र में लिखकर मांग की है कि जो वंदे मातरम नहीं बोल सकता वह देश के लिए बहुत खतरनाक है , इसलिए कठोर कानून बना कर, ऐसे गद्दारों को देश निकाला या राष्ट्रद्रोही मानकर फांसी की सजा मिलनी चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में कहा है कि आप ही हैं जो सनातनी भारत की रचना कर सकते है।आपको बता दें कि ये वही दिनेश फलाहारी महाराज हैं जिन्होंने 3 वर्ष पहले संकल्प लिया था कि जब तक मथुरा मंदिर से मस्जिद नहीं हटेगी तब तक वह भोजन नहीं करेंगे और अपने पैरों में जूता चप्पल भी नहीं पहनेंगी, ये आज भी अपने संकल्प पर कायम हैं ।

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