सिम्स हॉस्पिटल में डॉ. एस.के. गुप्ता ने रचा इतिहास, ब्रेन एन्यूरिज्म का कोइलिंग द्वारा किया सफल ऑपरेशन

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मथुरा । आगरा निवासी सुशीला को एक दिन अचानक ब्रेन स्ट्रोक हुआ, बेहोशी और पैरालिसिस आने पर शरीर ने काम करना बंद कर दिया। परिवारीजन सुशीला को तत्काल सिम्स हॉस्पिटल ले आये। जरूरी जाँचों से ज्ञात हुआ कि सुशीला को ब्रेन एन्यूरिज्म की समस्या है और सुशीला के मस्तिष्क की कुछ नसें फूलकर फट चुकी हैं, जिनके कारण नसों के आसपास रक्तजमा हो गया है। इसके समाधान के लिए वरिष्ठ न्यूरोसर्जन डॉ. एस.के. गुप्ता ने अत्याधुनिक एंडोवेस्कुलर न्यूरोसर्जरी द्वारा कोइलिंग तकनीक से इलाज करने की सलाह दी। परिवार की सहमति के बाद डॉ. एस.के. गुप्ता और उनकी अनुभवी टीम ने सुशीला जी का बिना सिर खोले कोइलिंग तकनीक से सफल ऑपरेशन किया। अब सुशीला बिल्कुल स्वस्थ हैं और इनके परिवार ने सिम्स हॉस्पिटल और डॉ. एस.के. गुप्ता का आभार व्यक्त किया। इस तरह के अत्याधुनिक ऑपरेशन करने वाले डॉ. एस.के. गुप्ता बृज क्षेत्र के एकमात्र न्यूरोसर्जन हैं जो कई वर्षों से बृजवासियों की सेवा कर रहे हैं।
सिम्स हॉस्पिटल के न्यूरोसर्जरी विभाग के वरिष्ठ सलाहकार डॉ. एस.के. गुप्ता ने कहा कि मरीज सुशीला जी को ब्रेन स्ट्रोक हुआ था, इनके दिमाग की नसों में एक गुब्बारा सा फूल गया जिसे ब्रेन एन्यूरिज्म कहते है। उसका हमने एक छोटे चीरे से कोइलिंग तकनीक द्वारा सफल इलाज किया है। इसमें सिर को खोलने की जरूरत नहीं पड़ती है। साथ ही क्षतिग्रस्त नसों को इस प्रकार स्वस्थ किया जाता है कि भविष्य में इस प्रकार से न फूले और न ही इस कारण रक्तस्त्राव हो। इस प्रकार की सर्जरी में मरीज को कुछ ही दिनों में छुट्टी मिल जाती है और मरीज हफ्ते भर के अंदर अपने काम पर जा सकता है। और यह तकनीक ओपन सर्जरी की अपेक्षा अधिक सुरक्षित मानी जाती है। ब्रेन न्यूरिज्म का कोइलिंग तकनीक द्वारा विश्वस्तरीय इलाज सिर्फ सिम्स हॉस्पिटल में मौजूद है। जरूरतमंद मरीज सिम्स हॉस्पिटल में आकर इस सुविधा का लाभ ले सकते हैं। इलाज का खर्चा महानगरों की अपेक्षा काफी कम है।
इस अवसर पर सिम्स हॉस्पिटल के चेयरमैन डॉ. गौरव भारद्वाज ने कहा कि सिम्स है तो मुमकिन है। सभी प्रकार स्ट्रोक के इलाज के लिए सिम्स हॉस्पिटल बृज क्षेत्र का एकमात्र स्ट्रोक रेडी हॉस्पिटल है, यहाँ एक ही छत के नीचे अनुभवी न्यूरोसर्जन, न्यूरोफिजिशियन, 3टीपी टेस्ला एम.आर.आई., सीटी स्कैन, एडवांस्ड कैथलेब, मॉड्यूलर ओ.टी. आदि स्वास्थ्य सुविधायें उपलब्ध है। स्ट्रोक की समस्या के लिए अब किसी को भी दिल्ली एनसीआर नहीं जाना पड़ेगा।

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