छटीकरा के दिग्गज पहलवान ठाकुर महावीर सिंह का निधन, क्षेत्र में छाया शोक

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फाइल फोटो – ठाकुर महावीर सिंह

मथुरा । थाना जैंत क्षेत्र के गांव छटीकरा निवासी ठाकुर महावीर सिंह पहलवान का शुक्रवार की रात्रि निधन हो गया। 85 वर्षीय ठाकुर महावीर सिंह पिछले एक वर्ष से बीमार चल रहे थे। शुक्रवार की रात लगभग 8 बजे उन्होंने अपने छटीकरा स्थित आवास पर अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर फैलते ही पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। परिजनों और ग्रामीणों ने उसी रात उनका अंतिम संस्कार कर दिया, जिसमें सैकड़ों की संख्या में लोग शामिल हुए।
ठाकुर महावीर सिंह अपने जमाने के नामचीन और हिम्मती पहलवानों में शुमार थे। उन्होंने अपने जीवन में अनेक राष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर की कुश्तियों में भाग लेकर मथुरा का नाम रोशन किया। पहलवानी के साथ-साथ वे गरीबों के मसीहा और समाजसेवा के प्रतीक माने जाते थे। उनकी सादगी, अनुशासन और लोगों की सेवा करने की भावना ने उन्हें समाज में एक अलग पहचान दिलाई।ठाकुर महावीर सिंह, हिंदुस्तान अखबार मथुरा के पत्रकार ठाकुर विष्णु पहलवान के सगे चाचा थे। उनके निधन की सूचना पर जिलेभर के सामाजिक, राजनीतिक और खेल जगत से जुड़े गणमान्य व्यक्तियों का उनके आवास पर तांता लगा रहा।
शोक व्यक्त करने वालों में उत्तर प्रदेश सरकार के राज्य मंत्री ठाकुर रघुराज सिंह, गोवर्धन विधायक ठाकुर महेश सिंह, विधायक ठाकुर ओम प्रकाश सिंह, पूर्व विधायक ठाकुर करिंदा सिंह, पीआरडी के रीजनल कमांडेंट विवेक चंद श्रीवास्तव, होमगार्ड विभाग के डिविजनल कमांडेंट ठाकुर राजेश कुमार सिंह, जिला कमांडेंट मथुरा ठाकुर शैलेन्द्र कुमार सिंह, राज वेध हरिओम चतुर्वेदी, सामलिया ग्रुप के चेयरमैन ठाकुर यशवीर सिंह राघव, करणी सेना के जिला अध्यक्ष ठाकुर कन्हैया सिंह, भारतीय किसान यूनियन भानु के राष्ट्रीय प्रवक्ता हरेश ठैनुआ,जिलाध्यक्ष देवेंद्र पहलवान,प्रधान रनवीर चौधरी,सपा नेता ठाकुर किशोर सिंह और ठाकुर मुकेश सिंह सिकरवार प्रमुख रहे।इसके अलावा जिला कुश्ती संघ मथुरा के अध्यक्ष राजकुमार गौतम, महासचिव जनार्दन पहलवान, पूर्व भारत केसरी देवेंद्र पहलवान, एसपी ट्रैफिक मथुरा मनोज यादव, पूर्व अंतरराष्ट्रीय पहलवान रामनिवास शर्मा और शिवालय पहलवान,एथलीट एशिया चैंपियन गुलवीर सिंह, साथ ही अखाड़ा गोपाल आश्रम के संचालक नरेंद्र चतुर्वेदी ने भी गहरा शोक व्यक्त किया।
सभी ने कहा कि ठाकुर महावीर सिंह न केवल एक हिम्मती पहलवान थे, बल्कि युवाओं के प्रेरणास्रोत और गरीबों के सच्चे साथी थे। उनके जाने से मथुरा की धरती ने एक ऐसे सपूत को खो दिया, जिसकी भरपाई कभी नहीं हो सकेगी। क्षेत्र में उनका योगदान और मानवीय संवेदनाएं हमेशा लोगों के दिलों में जीवित रहेंगी।

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